शिमला। हिमाचल प्रदेश में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल करने वालों की खैर नहीं। सुक्खू सरकार ने परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है।
नकल और पेपर लीक पर अब कड़ी सजा
आपको बता दें कि सरकार ने हिमाचल प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम–2025 को 9 फरवरी 2026 से प्रभावी करने की अधिसूचना जारी कर दी है। नए कानून के तहत भर्ती परीक्षा में नकल करने या नकल करवाने वालों को न्यूनतम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की कठोर कैद का प्रावधान किया गया है।
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करोड़ों रुपये का जुर्माना
इसके साथ ही दोषी पर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इस अपराध को संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है, जिससे आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिल सकेगी। वहीं, इस अपराध में सहयोग करने या किसी अन्य रूप में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के लिए 3 से 5 वर्ष तक की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
अधिनियम लागू करने की अधिसूचना जारी
कार्मिक विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अधिनियम की धारा-1 की उपधारा (2) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल ने इसके प्रवर्तन की तिथि घोषित की है। अधिनियम के लागू होते ही भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सभी गंभीर अपराधों पर सख्त दंडात्मक प्रावधान प्रभावी हो गए हैं।
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संगठित अपराधों पर और ज्यादा सख्ती
अधिनियम में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि नकल, पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी संगठित गिरोह या माफिया के माध्यम से की जाती है, तो सजा और भी कड़ी होगी। इन मामलों में शामिल अपराधों में शामिल हैं-
- प्रश्नपत्र लीक करना
- डिजिटल उपकरणों के माध्यम से परीक्षा में हेरफेर
- उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़
- फर्जी अभ्यर्थी बैठाना
- परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने की साजिश
- साथ ही परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों और उनके कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की गई है।
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मिलेगी सख्त से सख्त सजा
नए कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई सेवा प्रदाता कंपनी या एजेंसी नकल या परीक्षा अपराधों में संलिप्त पाई जाती है, तो उसे भी करोड़ों रुपये जुर्माना लगेगा। इतना ही नहीं, संबंधित परीक्षा का पूरा आयोजन खर्च भी उसी सेवा प्रदाता से वसूला जाएगा और उसे चार वर्षों तक किसी भी सार्वजनिक परीक्षा के संचालन से प्रतिबंधित किया जाएगा। अगर दोष सिद्ध होता है, तो सेवा प्रदाता कंपनी के निदेशक, मैनेजर या अन्य जिम्मेदार कर्मियों को 3 से 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है।
किसे मिली जांच की जिम्मेदारी?
अधिनियम के तहत ऐसे मामलों की जांच पुलिस उप अधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारी करेंगे। इसके अलावा राज्य सरकार को यह अधिकार भी होगा कि वह किसी भी मामले की जांच किसी अन्य विशेष जांच एजेंसी को सौंप सके।
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नकल माफिया पर कसेगा शिकंजा
राज्य सरकार का दावा है कि इस सख्त कानून के लागू होने से नकल माफिया और संगठित गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगेगा। बीते वर्षों में प्रदेश में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल के कई गंभीर मामले सामने आए थे, जिससे युवाओं का भरोसा डगमगा गया था।
इसी कड़ी में पूर्व में सामने आए पुलिस भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले के बाद भर्ती परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। लगातार अनियमितताओं के चलते सरकार ने कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को भंग कर दिया था और अब उसका नए सिरे से गठन किया गया है।
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पहले क्या था प्रावधान?
इससे पहले भर्ती परीक्षाओं को लेकर केवल नियम और विभागीय दिशानिर्देश ही लागू थे। सख्त दंडात्मक कानून के अभाव में मामलों की जांच तो होती थी, लेकिन कठोर कार्रवाई संभव नहीं हो पाती थी। अब नए कानून में भारी जुर्माने, लंबी सजा और गैर-जमानती प्रावधान शामिल कर दिए गए हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
