#हादसा
February 8, 2026
हिमाचल : जिंदगी की जंग हारा HRTC ड्राइवर, पांच दिन पहले गहरी खाई में गिर गई थी बस
बस में सवार थे 36 लोग, ड्राइवर समेत 4 ने तोड़ा दम
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सिरमौर। देवभूमि ने एक और कर्मठ सारथी खो दिया। HRTC के चालक दिनेश कुमार शर्मा जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई हार गए। बीते पांच दिनों से PGI चंडीगढ़ में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे दिनेश ने रविवार देर रात करीब 2 बजे अंतिम सांस ली।
3 फरवरी की सुबह बिल्कुल आम दिनों जैसी थी। चौपाल-नेरवा से पांवटा साहिब की ओर रवाना हुई HRTC बस HP-66A-2588 में 36 यात्री सवार थे। सभी को भरोसा था कि अनुभवी चालक दिनेश कुमार उन्हें सुरक्षित उनकी मंजिल तक पहुंचाएंगे। लेकिन किसे पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
उत्तराखंड के क्वाणु क्षेत्र के पास अचानक बस अनियंत्रित हुई और गहरी खाई में जा गिरी। पल भर में खुशहाल सफर चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गया। इस भीषण हादसे में कई यात्री घायल हुए।

जबकि चालक दिनेश कुमार को सीने में गंभीर अंदरूनी चोटें आईं। वे खुद बुरी तरह लहूलुहान थे, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद भी उनकी चिंता अपनी नहीं, बल्कि यात्रियों की सलामती को लेकर थी।
हादसे के बाद दिनेश को पहले विकासनगर और फिर गंभीर हालत में PGI चंडीगढ़ रेफर किया गया। परिवार, सहकर्मी और पूरा नेरवा क्षेत्र उनकी सलामती के लिए दुआओं में जुटा रहा। शनिवार तक हालात में कुछ सुधार के संकेत मिले थे।

उम्मीद जगी कि दिनेश मौत को मात दे देंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और रविवार रात सन्नाटे में उन्होंने जिंदगी की जंग हार दी। दिनेश के मौत के बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गई।
दिनेश कुमार शर्मा के निधन की खबर जैसे ही नेरवा और आसपास के क्षेत्रों में पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। आज जब उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव नेरवा पहुंचेगा, तो वहां बसों का शोर नहीं, बल्कि सिसकियों और आंसुओं की आवाज गूंजेगी।

HRTC चालक-परिचालक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष नवीन ठाकुर ने बताया कि पार्थिव शरीर को गांव पहुंचाने की सभी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। दिनेश के पैतृक गांव में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निगम ने एक अनुभवी, जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ चालक खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
सहकर्मियों के अनुसार दिनेश कुमार शर्मा अपने शांत स्वभाव, अनुशासन और यात्रियों के प्रति जिम्मेदारी के लिए जाने जाते थे। उन्होंने वर्षों तक HRTC की सेवा की और हर सफर को अपना कर्तव्य समझकर निभाया। उनकी असमय मौत न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे परिवहन विभाग के लिए अपूरणीय क्षति है।
आपको बता दें कि कवानू क्षेत्र के पास 3 फरवरी को सुबह HRTC की एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। नेरवा-पांवटा साहिब मार्ग पर पेश आए इस हादसे में HRTC बस के परखच्चे उड़ गए हैं। इस हादसे में दो महिलाओं समेत 3 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि, बस चालक समेत 28 लोग घायल हुए। अब हादसे में घायल हुए चालक ने भी दम तोड़ दिया है।