#उपलब्धि
August 1, 2025
हिमाचल के छोटे से गांव का बेटा आज भारतीय नौसेना में बना 47वां उप नौसेना प्रमुख
वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन ने आज ग्रहण किया कार्यभार
शेयर करें:
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश देवभूमि के साथ साथ वीरभूमि भी कही जाती है। इसी वीरभूमि के कई नौजवान आज देश की सरहदों पर अपनी जान की परवाह किये बिना मां भारती की सुरक्षा में तैनात हैं। ऐसे ही हिमाचल के एक लाल ने भारतीय सेना के सर्वोच्च पंक्ति में पहुंच कर ना सिर्फ अपने गांव का बल्कि पूरे हिमाचल का नाम रोशन कर दिया है। हमीरपुर जिला के रहने वाले संजय वात्स्यायन भारतीय नौसेना के 47वें उप नौसेना प्रमुख बन गए हैं।
हमीरपुर जिला निवासी वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन ने आज पहली अगस्त 2025 को भारतीय नौसेना के 47वें उप नौसेना प्रमुख के रूप में औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण कर लिया है। नई जिम्मेदारी संभालने से पूर्व उन्होंने राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर वीरगति को प्राप्त सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा और समर्पण का परिचय दिया।
यह भी पढ़ें : लॉटरी पर गरमाई सियासत: जयराम बोले- प्रदेश को बर्बादी की तरफ धकेल रही सुक्खू सरकार
हमीरपुर जिले के छोटे से गांव हीरानगर में जन्मे संजय वात्स्यायन का सैन्य जीवन अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता का प्रतीक रहा है। वर्ष 1988 में भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त करने के बाद से उन्होंने लगभग चार दशकों तक राष्ट्र सेवा के विभिन्न महत्वपूर्ण पड़ाव तय किए। उनके इस उल्लेखनीय सफर ने न केवल हिमाचल बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है।
वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन को अपने सैन्य करियर में कई अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों की कमान संभालने का अवसर मिला। इनमें आईएनएस विभूति, आईएनएस नाशक और आईएनएस सह्याद्री जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत शामिल हैं। उन्होंने इन जहाजों पर न केवल संचालनात्मक दक्षता का परिचय दिया, बल्कि समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाई।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: सालगिरह की पार्टी मनाने के बाद नहर में डूबे थे दो दोस्त, 6 दिन बाद मिली देह
पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग के रूप में उनकी नेतृत्व क्षमता की व्यापक सराहना हुई। इस दौरान उन्होंने कई सामरिक अभियानों और संयुक्त अभ्यासों का नेतृत्व किया। इसके अलावा वे संयुक्त निदेशक (कार्मिक), निदेशक (नौसेना योजना), और मुख्य निदेशक (नौसेना योजना) जैसे महत्त्वपूर्ण नीति-निर्धारण पदों पर भी सेवाएं दे चुके हैं।
उनकी सेवा और समर्पण के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और नौ सेना मेडल (NM) जैसे प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से सम्मानित किया गया है। ये पुरस्कार उनकी वीरता, नेतृत्व क्षमता और रणनीतिक सूझबूझ के साक्षात प्रमाण हैं।
भारतीय नौसेना आज एक अत्याधुनिक] आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर उभरती समुद्री शक्ति है। ऐसे में वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन का अनुभव और नेतृत्व नौसेना की विकास योजनाओं में निर्णायक भूमिका निभाएगा। समुद्री नीति, रणनीतिक योजनाओं और रक्षा तैयारियों के क्षेत्रों में उनका योगदान आने वाले समय में और भी महत्त्वपूर्ण सिद्ध होगा।
अपने निजी जीवन में वे पत्नी सरिता वात्स्यायन और दो बच्चों के साथ रहते हैं। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया और कहा कि परिवार का साथ और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति रहा है। उनके बिना यह यात्रा संभव नहीं होती। वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन की यह नियुक्ति हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए एक मिसाल है। यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों और छोटे गांवों से भी निकलकर कोई युवा यदि लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे तो देश की सर्वोच्च सेवाओं में स्थान प्राप्त कर सकता है।