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January 4, 2026

हिमाचल: दो सगे भाई पहनेंगे सेना की वर्दी, सबसे खतरनाक फोर्स में हुआ दोनों का चयन

पिता के बाद मां ने कड़े संघर्षों से पाले बेटे, आज गर्व से ऊंचा कर दिया सिर

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indian army two brother

पालमपुर (कांगड़ा)। जब जज़्बा एक हो, खून में देशभक्ति बसी हो और सपनों को सच करने का हौसला मजबूत हो, तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक पातीं। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल के कांगड़ा जिला के दो सगे भाईयों ने। इन दोनों भाईयों का चयन भारतीय सेना की सबसे खतरनाक फोर्स में हुआ है। एक साथ दोनों बेटों के सेना में चयन होने से उसके परिवार के साथ साथ पूरे गांव में खुशी और गर्व का माहौल है।

दो सगे भाइयों का पैरा स्पेशल फोर्स में हुआ चयन

दरअसल पालमपुर उपमंडल के विकास खंड भवारना की ग्राम पंचायत बड़घवार के वार्ड नंबर-3 से ताल्लुक रखने वाले दो सगे भाइयों ने वह कर दिखाया है, जिसका सपना हजारों युवा देखते हैं। शिवम कटोच और वंश कटोच दोनों भाइयों का चयन भारतीय सेना की सबसे प्रतिष्ठित पैरा स्पेशल फोर्स में हुआ है।

 

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कड़ी मेहनत से हासिल किया मुकाम

धर्मशाला में आयोजित सेना भर्ती के दौरान दोनों भाई एक साथ चयन प्रक्रिया में शामिल हुए थे। कड़ी मेहनत, अनुशासन और शारीरिक.मानसिक मजबूती के बल पर दोनों ने एक साथ सफलता हासिल कर अपने गांव, पंचायत और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया। यह महज संयोग नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और संकल्प का परिणाम है कि दोनों सगे भाई एक साथ देश की सबसे चुनौतीपूर्ण सैन्य इकाई का हिस्सा बनने जा रहे हैं।

 

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बेंगलुरु और हैदराबाद में लेंगे प्रशिक्षण

चयन के बाद दोनों भाइयों को अलग.अलग जिम्मेदारियों के लिए चुना गया है। बड़ा भाई शिवम कटोच पैरा सेंटर में भर्ती हुआ है, जहां उसे बेंगलुरु में कठिन और विशेष प्रशिक्षण से गुजरना होगा। वहीं छोटा भाई वंश कटोच पैरा फील्ड यूनिट में चयनित हुआ है और उसकी ट्रेनिंग आरटी सेंटर, हैदराबाद में होगी। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद दोनों भारतीय सेना की अग्रिम पंक्ति में देश की रक्षा का दायित्व निभाएंगे।

 

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पिता के देहांत के बाद मां ने नहीं हारी थी हिम्मत

इन दोनों भाइयों की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे संघर्ष और त्याग की एक भावुक कहानी भी छिपी है। पिता कुलदीप कटोच का देहांत काफी पहले हो चुका था। पिता का साया उठ जाने के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी मां किरण कटोच के कंधों पर आ गई। कठिन हालात, आर्थिक चुनौतियां और सामाजिक दबाव हर मोर्चे पर मां ने हिम्मत नहीं हारी और बेटों के सपनों को अपना सपना बना लिया।

 

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मां के त्याग और संघर्ष का ही नतीजा है कि आज दोनों बेटे वर्दी पहनने जा रहे हैं। माता-पिता के अधूरे सपनों को साकार करते हुए शिवम और वंश ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन कभी बेकार नहीं जाती। बेटे देश सेवा के लिए तैयार हैं और मां की आंखों में गर्व के आंसू छलक रहे हैं। गांव और पंचायत में दोनों भाइयों की सफलता पर खुशी का माहौल है। लोग इसे पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा मान रहे हैं। 

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