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November 14, 2025
ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुए हिमाचल के ड्रोन : इंडियन आर्मी को मिली खास मदद, जानें
IIT मंडी, DRDO के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं पर भी कार्य कर रहे हैं।
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मंडी। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया। युद्ध के समय हिमाचल के कई वीर सरहदों पर डटे हुए थे। बीना अपनी जान की परवाह किए देश के लिए दुश्मनों को मुंहतोड़ जबाव दे रहे थे। वहीं, हिमाचल एक बार फिर अपनी उच्चस्तरीय तकनीकी क्षमता और रक्षा सहयोग के लिए सुर्खियों में आ गया है।
दरअसल, IIT मंडी में विकसित ड्रोन तकनीक ने भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अहम भूमिका निभाई है। इस अभियान के दौरान IIT मंडी द्वारा सेना को कुल 10 अत्याधुनिक ड्रोन उपलब्ध कराए गए, जिनका उपयोग पाकिस्तान की ओर से बढ़ते खतरे और चुनौतियों से निपटने में किया गया।
इसी कारण जब सेना को त्वरित आवश्यकता पड़ी, तो IIT मंडी ने बिना देरी किए 10 उच्च गुणवत्ता वाले ड्रोन भेजकर देश की सुरक्षा में अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य तकनीक को राष्ट्रीय सुरक्षा तथा रक्षा-सुदृढ़ीकरण से जोड़ना है। ड्रोन टेक्नोलॉजी लैब और IIT मंडी, DRDO के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं पर भी कार्य कर रहे हैं।
प्रो. बेहरा ने बताया कि आईआईटी मंडी द्वारा विकसित अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगातार बेहतर परिणाम दे रहा है। जहां यह प्रणाली पहले केवल भूस्खलन की पूर्व चेतावनी देने में सक्षम थी, अब इसे और उन्नत किया गया है। नया सिस्टम आने वाले समय में भूकंप की प्रारंभिक चेतावनी भी दे सकेगा, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में जान-माल की हानि को काफी हद तक रोका जा सकेगा। यह तकनीक हिमाचल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
समारोह के मुख्य अतिथि और CSIR के पूर्व महानिदेशक प्रो. शेखर मांडे ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी प्रतिभा और नवाचार क्षमता को देश के विकास में समर्पित करें। समारोह में DRDO के सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज (चेस) के निदेशक डॉ. जगन्नाथ नायक और आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. बुदराजू श्रीनिवास मूर्ति भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
IIT मंडी के 13वें दीक्षांत समारोह में कुल 604 छात्रों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 292 स्नातक, 241 स्नातकोत्तर और 71 पीएचडी शोधार्थी शामिल थे। समारोह में शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार और नेतृत्व में असाधारण योगदान देने वाले विद्यार्थियों को पदक और विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
IIT मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मिधर बेहरा ने संस्थान के 13वें दीक्षांत समारोह के उपरांत मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि उनकी ड्रोन टेक्नोलॉजी लैब निरंतर उन्नत शोध और इनोवेशन पर काम कर रही है। IIT मंडी का यह उपलब्धियों भरा सफर न केवल संस्थान की प्रतिष्ठा बढ़ाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि हिमाचल के पर्वतीय क्षेत्र में स्थित यह संस्थान देश की रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के भविष्य में अहम भूमिका निभा रहा है।