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December 21, 2025
हिमाचल : मिलिट्री अस्पताल में सेवाएं देगा गांव का बेटा, कड़ी मेहनत से सच किया डॉक्टर बनने का सपना
IGMC शिमला में भी एक साल तक की इंटर्नशिप
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बिलासपुर। वीरभूमि कहलाए जाने हिमाचल के सैकड़ों लाल देश सेवा में डटे हुए हैं। इसी कड़ी में अब हिमाचल के बिलासपुर जिले के छोटे से गांव के एक बेटे ने भी अपना नाम होनहारों की लिस्ट में जोड़ लिया है।
घुमारवीं उपमंडल के अंतर्गत आने वाले गांव दधोल कलां के होनहार बेटे डॉ. हिमांशु शर्मा ने अपनी मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण से न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
डॉ. हिमांशु का चयन भारतीय सेना में कैप्टन (डॉक्टर) के पद पर हुआ है। उनकी पहली नियुक्ति मिलिट्री अस्पताल शिमला में हुई है, जिससे गांव से लेकर घुमारवीं क्षेत्र तक खुशी और गर्व का माहौल है।
डॉ. हिमांशु शर्मा की सफलता किसी एक दिन की नहीं, बल्कि वर्षों की निरंतर मेहनत और संघर्ष का परिणाम है। उनकी शैक्षणिक यात्रा शुरू से ही सराहनीय रही है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती विद्या मंदिर, दधोल से प्राप्त की, जहां से ही उनके अंदर अनुशासन और मेहनत की नींव पड़ी।
इसके बाद उन्होंने घुमारवीं के प्रतिष्ठित मिनर्वा पब्लिक स्कूल से उच्च एवं वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ वे हमेशा लक्ष्य के प्रति गंभीर रहे और चिकित्सा क्षेत्र में देश सेवा का सपना संजोए हुए आगे बढ़ते रहे।

डॉक्टर बनने के अपने सपने को साकार करने के लिए डॉ. हिमांशु ने विदेश जाकर पढ़ाई करने का कठिन निर्णय लिया। उन्होंने रूस की साइबेरियन स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, तोमस्क से MBBS की डिग्री हासिल की। विदेशी जमीन पर रहकर भाषा, मौसम और संस्कृति की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने पूरी लगन से अपनी पढ़ाई पूरी की।
भारत लौटने के बाद उन्होंने इंडियन मेडिकल काउंसिल की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण की, जो विदेश से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जाती है। इसके बाद उन्होंने IGMC शिमला में एक वर्ष की इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूरी की और चिकित्सा सेवा में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
देश सेवा की प्रबल भावना के चलते डॉ. हिमांशु ने केवल एक सामान्य चिकित्सक बनने तक ही अपने सपनों को सीमित नहीं रखा। उन्होंने आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज (AFMS) की परीक्षा दी और उसे सफलतापूर्वक पास कर भारतीय सेना में डॉक्टर के रूप में चयनित हुए। अब वे सेना में कैप्टन रैंक के अधिकारी के तौर पर अपनी सेवाएं देंगे और सैनिकों व उनके परिवारों की चिकित्सा देखभाल में अहम भूमिका निभाएंगे।
डॉ. हिमांशु शर्मा एक शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता डॉ. किशोरी लाल शर्मा शिक्षा विभाग से प्रवक्ता के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि उनकी माता सुरेखा शर्मा वर्तमान में सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डंगार में अध्यापिका के पद पर सेवाएं दे रही हैं। माता-पिता ने बेटे की इस उपलब्धि को पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि हिमांशु ने मेहनत और ईमानदारी से यह मुकाम हासिल किया है।
डॉ. हिमांशु की इस सफलता पर दधोल कलां गांव, घुमारवीं क्षेत्र और बिलासपुर जिले में खुशी की लहर है। ग्रामीणों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी। उनका जीवन यह संदेश देता है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो छोटे से गांव से निकलकर भी देश की सेवा के बड़े अवसर हासिल किए जा सकते हैं।