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April 9, 2025
IIT मंडी का कमाल : आपदा में लापता लोगों को पानी के अंदर से ढूंढ निकालेगी ये गाड़ी
पानी के अंदर 200 मीटर तक की गहराई में काम करने में है सक्षम
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मंडी। हिमाचल प्रदेश की आईआईटी मंडी तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी सफलता की ओर बढ़ी है। संस्थान ने एक मछली के आकार वाला अंडरवॉटर व्हीकल तैयार किया है, जो पानी के भीतर 200 मीटर तक जाकर खोज और निगरानी करने में सक्षम है। यह इनोवेशन बाढ़ या बांध हादसों जैसी आपदाओं में लापता लोगों को तलाशने में मददगार साबित हो सकता है।
सुंदरनगर जलाशय में इसके सफल परीक्षण के बाद अब इसे व्यावहारिक उपयोग में लाने की तैयारी की जा रही है। यह तकनीक गोताखोरों पर निर्भरता को कम करके राहत कार्यों को तेज बनाएगी। शोधकर्ताओं ने एक ऐसा अंडरवॉटर व्हीकल तैयार किया है, जो मछली के आकार का है और पानी के भीतर 200 मीटर तक की गहराई में काम करने में सक्षम है। इस अभिनव प्रोजेक्ट को "फिक्स्ड थ्रस्टर अंडरवॉटर व्हीकल" नाम दिया गया है।
यह अंडरवॉटर वाहन विशेष रूप से उन जलाशयों की आंतरिक संरचना का निरीक्षण करने के लिए विकसित किया गया है जो किसी बांध के निर्माण के बाद बनते हैं। अकसर इन जलाशयों में समय के साथ सिल्ट यानी गाद जमा हो जाती है, जिससे जल संग्रहण क्षमता पर असर पड़ता है। ऐसे में यह वाहन बिना गोताखोरों के सहयोग से जलाशयों की गहराइयों में जाकर वहां की स्थिति का सटीक मूल्यांकन कर सकता है।
आईआईटी मंडी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जगदीश के अनुसार, यह अंडरवॉटर व्हीकल न केवल जलाशय में गाद की मात्रा मापने में कारगर है, बल्कि बांध की आंतरिक दीवारों की स्थिति का आकलन करने में भी सक्षम है। यदि दीवार में किसी प्रकार की दरार या कमजोरी मौजूद है तो यह मशीन उसे सटीकता से पहचान सकती है।
पारंपरिक तौर पर जलाशयों के भीतर निरीक्षण के लिए गोताखोरों की मदद ली जाती रही है। लेकिन इस तकनीक के आने से न केवल यह कार्य अधिक सुरक्षित हो जाएगा, बल्कि समय और संसाधनों की भी बचत होगी। इसके जरिए पानी के भीतर वेल्डिंग और कटिंग जैसे कार्य भी किए जा सकते हैं, जो भविष्य में मरम्मत और रखरखाव के लिहाज़ से अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।
इस खास प्रोजेक्ट को आईआईटी मंडी ने आईआईटी पलक्कड़ के साथ मिलकर विकसित किया है। इससे पहले भी दोनों संस्थान मिलकर समुद्र के अंदर की हलचलों को समझने के लिए मछली के आकार का एक प्रोटोटाइप तैयार कर चुके हैं। यह नवीनतम परियोजना उस प्रयास की अगली कड़ी मानी जा सकती है।
इस अंडरवॉटर व्हीकल का परीक्षण हाल ही में सुंदरनगर के जलाशय में बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड) की मदद से किया गया। परीक्षण के परिणाम संतोषजनक रहे और इससे साबित हुआ कि यह मशीन जलाशयों के भीतर सटीक निरीक्षण करने में सक्षम है।
अब इस तकनीक को सरकारी और औद्योगिक स्तर पर उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है। IIT मंडी की टीम इस दिशा में औपचारिक स्वीकृति और उपयोग की संभावनाओं पर काम कर रही है। यह परियोजना न केवल विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धि है, बल्कि बांधों की सुरक्षा और जल प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।