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May 13, 2025
हिमाचल : इस गांव के रग-रग में बसी देश सेवा- बॉर्डर पर तैनात है हर घर का बेटा
आठ युवा हाल ही में बने अग्निवीर
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लाहौल। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल स्पीति की गहराइयों में बसे हिंसा गांव की पहचान अब वीरता से जुड़ चुकी है। कुल 72 परिवारों के इस छोटे से गांव के 38 युवा वर्तमान में भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि 12 पूर्व सैनिक रिटायर होकर आज भी देशभक्ति की मिसाल बने हुए हैं। इनमें से 23 जवान इस समय जम्मू-कश्मीर की सीमा पर तैनात हैं। गांव की मिट्टी में देश सेवा की ऐसी प्रेरणा है कि स्कूल स्तर पर ही बच्चे खेलकूद और अनुशासन में कदम रखते हैं।
गांव के बुजुर्ग जय किशन बताते हैं कि हिंसा गांव से सबसे पहले सूर चंद लारजे भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। तभी से यह परंपरा बन गई। अप्रैल 2024 में इस गांव से एक साथ आठ युवाओं ने अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती होकर एक नया इतिहास रच दिया। कई घरों में एक नहीं बल्कि दोनों बेटे देश की सेवा में हैं।
दुर्गम और बर्फीले इलाकों में बसे इस गांव में ना तो कोई आर्मी ट्रेनिंग सेंटर है, ना ही स्पोर्ट्स अकादमी। फिर भी यहां के युवा स्कूली स्तर से ही अपने शरीर और मन को फौज के लायक बना लेते हैं। पूर्व सैनिक राम लाल ठाकुर बताते हैं कि यहां के बच्चों में खेलकूद और अनुशासन की समझ बचपन से ही विकसित हो जाती है।
| श्रेणी | संख्या (व्यक्ति) |
|---|---|
| कुल परिवार | 72 |
| वर्तमान में सेना में तैनात जवान | 38 |
| इनमें से जम्मू-कश्मीर बॉर्डर पर तैनात जवान | 23 |
| अग्निवीर योजना के तहत भर्ती युवा (2024) | 8 |
| सेवानिवृत्त सैनिक | 12 |
| ITBP (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) में तैनात | 2 |
| SSB (सशस्त्र सीमा बल) में तैनात | 2 |
गांव के अजीत सिंह ने बताया कि उनके दो चचेरे भाई संजीत सिंह और सुरजीत सिंह सेना में हैं। इनमें से एक जम्मू-कश्मीर तो दूसरा बॉर्डर पर तैनात है। भारत-पाक तनाव के बीच उनकी कोई बात नहीं हो पा रही है। राम सिंह ने कहा कि उनका बड़ा भाई पूर्ण चंद समदो में तैनात है, जो तनाव बढ़ने से पहले छुट्टी पर आया था लेकिन हालात देखते ही ड्यूटी पर लौट गया।देश की सरहदों की हिफाज़त के लिए ये वीर सपूत हर समय तैयार रहते हैं। हिंसा गांव अब सिर्फ एक बर्फीला इलाका नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बन गया है।