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October 28, 2026

लंका दहन से हुआ कुल्लू दशहरा का समापन, देवालयों को लौटे 300 देवी-देवता

रघुनाथजी की रथयात्रा रही आकर्षण का केंद्र

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himachal Kullu Dussehra

कुल्लू। देवभूमि कुल्लू में सात दिनों तक आस्था और देव परंपराओं से सजा अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव मंगलवार को लंका दहन के साथ संपन्न हो गया। भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के बीच करीब 300 देवी-देवताओं ने अपने-अपने देवालयों की ओर विदाई ली।

 

इस दौरान ढालपुर मैदान में देव ध्वनियों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। उत्सव के समापन पर पूरा माहौल आस्था और भावुक विदाई से भर गया। समापन समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी शामिल हुए।

रघुनाथजी की रथयात्रा रही आकर्षण का केंद्र

लंका दहन के दौरान भगवान रघुनाथजी की भव्य रथयात्रा उत्सव का मुख्य आकर्षण रही। देव परंपराओं के अनुसार सभी रस्में पूरी की गईं। लंका दहन के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग उत्सव में शामिल हुए और देव परंपराओं के साक्षी बने।

 

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देवी-देवताओं की विदाई पर भावुक हुआ ढालपुर

दशहरा उत्सव के दौरान ढालपुर में जुटे देव समाज, कारकूनों, देवलुओं और श्रद्धालुओं के लिए आखिरी दिन खुशी के साथ भावुकता भरा भी रहा। सात दिनों तक देवताओं की मौजूदगी से गुलजार रहा ढालपुर मैदान अब धीरे-धीरे खाली होने लगा।

 

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सदियों पुरानी परंपरा के साथ लौटे देवी-देवता

सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार दशहरा उत्सव खत्म होने के बाद देवी-देवता अपने-अपने क्षेत्रों की ओर लौट गए। जैसे-जैसे देवता अपने देवालयों के लिए रवाना हुए, वैसे-वैसे ढालपुर का देवमय माहौल भी शांत होने लगा। इसके साथ ही एक बार फिर कुल्लू दशहरा उत्सव की यादें लोगों के बीच रह गईं।

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