#उपलब्धि
August 24, 2025
हिमाचल : पोती नहीं भूली दादा की कैंसर पीड़ा, खूब मेहनत कर बनी डॉक्टर- देशभर में पाई 269वीं रैंक
मीनाक्षी ने कई संघर्षों का किया सामना
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कुल्लू। किसी ने क्या खूब लिखा है कि मेहनत की राह पर जो बढ़ता है, किस्मत भी उसके कदम चूम लेती है… सपनों को सच करने की ठान ले, तो मुश्किलें भी सलाम कर लेती हैं।” ऐसा ही कुछ कर दिखाया है कुल्लू जिले की मीनक्षी ने।
कुल्लू जिले के गांधीनगर क्षेत्र की बेटी डॉ. मीनाक्षी बधवा ने अपनी लगन और अथक परिश्रम के दम पर ऐसा ही कर दिखाया है। NEET-PG 2025 के परिणाम में मीनाक्षी ने पहले ही प्रयास में 650 अंक प्राप्त कर देशभर में 269वीं रैंक हासिल की है।
मीनाक्षी का यह सफर आसान नहीं था। बचपन से ही उन्होंने संघर्षों का सामना किया। उनके पिता गोपाल बधवा कुल्लू में एक छोटा भोजनालय चलाते हैं और मां ममता बधवा गृहिणी हैं। सीमित साधनों के बीच भी परिवार ने हमेशा बेटी की पढ़ाई को प्राथमिकता दी।
मीनाक्षी बताती हैं कि उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब उनके दादा जी कैंसर से जूझ रहे थे। उस समय उन्होंने ठान लिया था कि डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करनी है। पिता गोपाल बधवा भी कहते हैं— “बचपन से ही बेटी ने संघर्ष किया। जब उसके दादा जी बीमार थे, तभी उसने संकल्प लिया कि डॉक्टर बनना है। रात को पढ़ाई के लिए जागती थी, कभी थकान को आड़े नहीं आने दिया।”
शैक्षणिक यात्रा में भी मीनाक्षी ने हर बार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। IGMC शिमला से MBBS करने के दौरान उन्होंने पूरे साढ़े पांच साल के पाठ्यक्रम में हर वर्ष प्रदेश स्तर पर टॉप रैंक हासिल की। यह उपलब्धि उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और चिकित्सा क्षेत्र के प्रति समर्पण का प्रमाण है।
अपनी सफलता पर मीनाक्षी ने कहा कि यह उपलब्धि मेरे माता-पिता और दादा-दादी के आशीर्वाद के बिना संभव नहीं थी। मैंने हमेशा यही सपना देखा था कि डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करूं। अब मेरा लक्ष्य MD मेडिसिन या गायनी में विशेषज्ञता हासिल करना है।
आज मीनाक्षी की इस सफलता से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा कुल्लू जिला गर्व महसूस कर रहा है। साधारण परिवार से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाना उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने की हिम्मत रखते हैं।