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February 10, 2026

हिमाचल: 24 साल के आर्यमान ने रचा इतिहास, असिस्टेंट प्रोफेसर बनने वाले गांव के बने पहले युवा

छोटे से गांव से निकलकर हासिल किया बड़ा मुकाम

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Aaryaman-una

ऊना। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी गांवों से निकलकर देशभर में अपनी पहचान बनाने वाले युवाओं की फेहरिस्त लगातार लंबी होती जा रही है। सीमित संसाधन, कठिन परिस्थितियां और छोटे गांव इन सबके बावजूद प्रदेश के कई युवा आज अपनी मेहनत के दम पर वह मुकाम हासिल कर रहे हैं, जिसे कभी सपनों से आगे की चीज माना जाता था। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी ऊना जिले के उपमंडल अंब के गांव चोआर से सामने आई है, जहां 24 साल के आर्यमान जसवाल ने वह उपलब्धि हासिल कर ली, जो आज तक उनके गांव में कोई नहीं कर पाया था।

24 की उम्र में गांव के पहले असिस्टेंट प्रोफेसर

गांव चोआर के निवासी आर्यमान जसवाल को हरियाणा राज्य में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति मिली है। खास बात यह है कि मात्र 24 वर्ष की उम्र में आर्यमान अपने गांव के पहले युवा बन गए हैं, जिन्होंने इस पद तक पहुंचने का सपना साकार किया। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

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आर्यमान की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती। हिमाचल प्रदेश के कई युवा आज इसी तरह कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मान रहे हैं और निरंतर परिश्रम के बल पर शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।

सेना अनुशासन और शिक्षा का संगम

आर्यमान के पिता संजीव कुमार जो भारतीय सेना से सूबेदार मेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, ने अपने बेटे में अनुशासन और जिम्मेदारी के संस्कार बचपन से ही विकसित किए। सेवानिवृत्ति के बाद वे समाज सेवा और खेती से जुड़े हुए हैं। वहीं, आर्यमान की माता पूनम कुमारी एक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हिंदी विषय की शिक्षिका हैं। शिक्षा का यह वातावरण आर्यमान की सोच और लक्ष्य को दिशा देने में सहायक बना।

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गांव से विश्वविद्यालय तक का सफर

आर्यमान की प्रारंभिक शिक्षा अंब क्षेत्र के एक स्थानीय विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय, अंब से बीएससी मेडिकल साइंस की पढ़ाई पूरी की। आगे बढ़ते हुए उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से मेडिकल साइंस में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की। हर चरण में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर खुद को साबित किया।

शोध और उपलब्धियों से सजा शैक्षणिक सफर

पढ़ाई के साथ.साथ आर्यमान ने शोध के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई। उन्हें इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से जूनियर रिसर्च फेलोशिप प्राप्त हुई। वर्तमान में वे भारत सरकार की छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत पीएचडी शोध कार्य में भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, जो उनकी शैक्षणिक क्षमता और समर्पण को दर्शाता है।

किसे बताया सफलता की कुंजी

आर्यमान की इस सफलता पर उनके माता.पिता ने सभी शिक्षकों और मार्गदर्शकों का आभार जताया है। उन्होंने विशेष रूप से अम्ब कॉलेज के प्रोफेसर नितिन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने आर्यमान को इस मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

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प्रदेश के युवाओं के लिए मिसाल

आर्यमान जसवाल की कहानी यह संदेश देती है कि हिमाचल प्रदेश का युवा अब केवल सरकारी नौकरी की सीमाओं तक नहीं, बल्कि शिक्षा, शोध और अकादमिक क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छू रहा है। 24 साल की उम्र में गांव का पहला असिस्टेंट प्रोफेसर बनना न सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए यह भरोसा भी है कि मेहनत और लगन से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।

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