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August 29, 2025

मणिमेहश यात्रा : चार दिन में 11 शिव भक्तों की थमी सांसें, भारी बारिश के बीच फंसे हजारों- इंतजार में परिजन

बारिश और बादल फटने से तबाही

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Manimahesh Yatra 2025

चंबा। हिमाचल प्रदेश का चंबा जिला इन दिनों लगातार प्राकृतिक आपदाओं और हादसों से जूझ रहा है। खासतौर पर पवित्र मणिमहेश यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के लिए यह साल बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। पिछले चार दिनों में ही 11 श्रद्धालुओं की जान चली गई। मौतों के पीछे प्रमुख कारण ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, भारी बारिश से उत्पन्न भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसे हालात बताए जा रहे हैं।

ऑक्सीजन की कमी और लैंडस्लाइड

भरमौर क्षेत्र में 13 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित मणिमहेश झील तक जाने वाले कठिन ट्रैक पर कई श्रद्धालु अपनी जान गंवा बैठे। पंजाब के पठानकोट के अमन (18), रोहित (18) और गुरदासपुर के अनमोल (26) की अलग-अलग जगहों पर मौत हुई।

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अमन को कमलकुंड से रेस्क्यू किया गया था, लेकिन गौरीकुंड पहुंचते ही उसने दम तोड़ दिया। रोहित की सांसें कुगती ट्रैक पर थम गईं, जबकि अनमोल की मौत धंचो में हुई। तीनों के शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं।

बारिश और बादल फटने से तबाही

25 अगस्त को चंबा निवासी दर्शन देवी की पत्थर लगने से मौत हुई। इसके अगले ही दिन, भरमौर की बसोदन पंचायत में बादल फटने के बाद खजियार के पास दो मासूम बच्चे तेज़ बहाव की चपेट में आकर बह गए। इसी दौरान पहाड़ी से गिरे पत्थरों ने सलोचना (38) और कविता (33) की जान ले ली।

 

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26 अगस्त को ही चुराह के चयूली गांव की रेखा देवी पत्थरों की चपेट में आकर चल बसीं, जबकि दो अन्य लोग खेम राज और जय दयाल घायल हो गए। 28 अगस्त को उत्तर प्रदेश के सागर भटनागर की कुगती ट्रैक पर मौत हो गई। उनके साथ गए पांच अन्य श्रद्धालुओं को हालांकि सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।

प्रशासन ने देर से दी पुष्टि

24 से 26 अगस्त तक भारी बारिश के चलते पूरे चंबा जिले की मोबाइल कनेक्टिविटी ठप हो गई थी। यही कारण है कि कई मौतों की जानकारी प्रशासन तक देर से पहुंची। चार दिन बाद गुरुवार शाम को चंबा शहर में मोबाइल नेटवर्क बहाल हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने आधिकारिक रूप से इन मौतों की पुष्टि की।

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इस बार यात्रा में ज्यादा मुश्किलें

आधिकारिक तौर पर मणिमहेश यात्रा 16 अगस्त से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलनी थी, लेकिन लगातार खराब मौसम और हादसों के कारण इसे छह दिन पहले ही रोकना पड़ा। पिछले साल 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने यात्रा में हिस्सा लिया था, जबकि इस बार शुरुआत से ही बारिश और भूस्खलन की वजह से हालात बिगड़े रहे। इस सीजन में अब तक कुल 22 श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है।

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