#हादसा
January 26, 2026
हिमाचल: दो दिन बर्फ में संघर्ष करते रहे दोनों भाई, समय पर मदद मिलती तो बच सकती थी जा*न
चार दिन तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मिली दोनों भाईयों की देह
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला के भरमौर में बर्फबारी ने दो भाईयों की जिंदगी को छीन लिया। बर्फ की सफेद चादर दो परिवारों को ऐसे जख्म दे दिए, जो शायद पूरी जिंदगी नहीं भर पाएंगे। बताया जा रहा है कि दोनों युवक दो दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे, लेकिन सही समय पर मदद ना मिलने के चलते उनकी मौत हो गई। चार दिन बाद दोनों के शव बर्फ में दबे मिले।
बताया जा रहा है कि दोनों युवक 19 वर्षीय विकसित राणा और 13 वर्षीय पीयूष 23 जनवरी को घर से निकले थे। दोनों ही ममेरे भाई थे। विकसित अपनी मां का इकलौता सहारा था। एक साल पहले ही उसके पिता की मौत हो चुकी थी। अब घर में सिर्फ सन्नाटा और मातम बचा है। बेटे के शव को देख कर मां बेसुध हो चुकी है। यही हाल पीयूष के परिजनों का भी है। जवान बेटे की मौत ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया है।
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मिली जानकारी के अनुसार दोनों भाई 23 जनवरी को भरमाणी माता मंदिर की तरफ निकले थे। उनके साथ पीयूष का पालतू पिटबुल डॉग भी था। बताया जाता है कि वे अपने साथ सीमित कैंपिंग सामान भी लेकर गए थे। मंदिर में दर्शन के बाद दोनों युवाओं ने मंदिर से ऊपर स्थित सबसे ऊंची पहाड़ी की ओर रुख किया। मकसद था- वीडियो और रील बनाना। यहीं से यह सफर एक भयावह मोड़ लेने लगा।
अचानक मौसम के बदलने से बर्फबारी शुरू हो गई। हवाएं चलने लगीं और कुछ ही समय में चारों ओर सफेद अंधेरा छा गया। हालात बिगड़ते देख दोनों ने नीचे उतरने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसी बीच विकसित ने मोबाइल फोन से गांव के कुछ युवकों को कॉल कर मदद मांगी। उसने बताया कि वे भरमाणी माता मंदिर के ऊपर फंस गए हैं। सूचना मिलते ही गांव से कुछ युवक उन्हें बचाने के लिए निकले लेकिन भारी बर्फबारी के चलते वह बीच रास्ते से ही वापस लौट आए।
माना जा रहा है कि जो युवक मदद के लिए निकले थे अगर उन्होंने समय रहते प्रशासन से संपर्क किया होता तो दोनों किशोरों की जान बच सकती थी। जब दोनों युवक घर नहीं पहुंचे तो परिवार की चिंताएं बढ़ गई और उन्होंने प्रशासन से मदद मांगी। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। लेकिन बर्फ की मोटी परत, खराब मौसम और दुर्गम इलाके ने राहत कार्यों को बेहद कठिन बना दिया। ड्रोन से तलाश की गई, लेकिन हर तरफ सिर्फ बर्फ ही नजर आई। जिसके चलते सेना की मदद मांगी गई। भारतीय वायुसेना के दो हेलीकॉप्टर, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय लोग खोज में जुटे। हर गुजरते दिन के साथ उम्मीदें कमजोर होती चली गईं।
चार दिन बाद रेस्क्यू टीम भरमाणी माता मंदिर की ऊंची चोटी के पास पहुंची। सबसे पहले दोनों के बैग मिले, फिर कुछ दूरी पर जूते। आगे बढ़ने पर जो दृश्य सामने आया, उसने हर किसी को झकझोर दिया। बर्फ में दबा पीयूष का शव मिला। उसके शव के पास चार दिनों से बैठा था उसका पिटबुल डॉग-बिना खाना, बिना पानी। वह किसी को पास नहीं आने दे रहा था।
पीयूष के पैरों में स्लीपिंग बैग का कपड़ा बंधा हुआ था। आसपास बर्फ हटाने के निशान साफ दिख रहे थे। इससे साफ था कि वह आखिरी सांस तक बचने की कोशिश करता रहा। कुत्ते के गले में भी हल्की चोट थी, लेकिन उसने जगह नहीं छोड़ी। पीयूष के शव से करीब 700 मीटर दूर एक नाले में बिक्षित राणा का शव मिला।
एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों का कहना है कि शवों की स्थिति देखकर लगता है कि दोनों कम से कम दो दिन तक जीवित रहे। अगर उस समय मौसम अनुकूल होता, या सही रणनीति अपनाई जाती, या समय रहते मदद पहुंच जाती। आज दोनों के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए गए हैं।