#हादसा
February 1, 2026
हिमाचल : सड़क धंसने से खाई की तरफ लटकी HRTC बस, 15 लोग थे सवार; मची चीख-पुकार
करीब सवा घंटे तक सड़क पर आवाजाही पूरी तरह ठप रही
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के दुर्गम जिला चंबा में एक HRTC बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। चंबा-तीसा मुख्य मार्ग पर सरेला नामक स्थान पर अचानक सड़क धंसने से यात्रियों से भरी HRTC बस गहरी खाई के बिल्कुल किनारे जा फंसी।
बस में करीब 15 यात्री सवार थे, जिनकी जान कुछ पलों के लिए हलक में आ गई। हादसे में बस को काफी नुकसान हुआ है। हादसे के वक्त घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। पूरा इलाका बस में सवार लोगों की चीखों से दहल उठा।
जानकारी के अनुसार, HRTC की यह बस सनवाल से सुबह करीब 5 बजे पठानकोट रूट के लिए रवाना हुई थी। रोजमर्रा की तरह यात्री अपने काम से निकले थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि सफर बीच रास्ते में जानलेवा मोड़ ले लेगा।
सुबह लगभग 7 बजे जैसे ही बस सरेला क्षेत्र में पहुंची, सड़क का एक हिस्सा अचानक नीचे की ओर धंस गया। बस का पिछला टायर धंसी हुई सड़क और मलबे में फंस गया, जिससे बस एक ओर झुक गई। झटके के साथ बस के रुकते ही अंदर बैठे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
ऐसे नाजुक हालात में बस चालक ने बेहद सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। सड़क धंसते ही चालक ने तुरंत ब्रेक लगाकर बस को नियंत्रित किया और किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं की। चालक की यही समझदारी सभी यात्रियों की जान बचाने में निर्णायक साबित हुई।
चालक ने तुरंत स्थिति का आकलन कर सभी सवारियों को एक-एक कर सुरक्षित नीचे उतारा। बस से उतरते समय कई यात्रियों के हाथ-पैर कांप रहे थे और महिलाएं व बुजुर्ग सदमे की स्थिति में नजर आए। बताया जा रहा है कि अगर सड़क कुछ इंच और धंस जाती, तो बस सीधे लगभग 150 फीट गहरी खाई में गिर सकती थी।
बस सड़क के बीचों-बीच खाई की ओर फंसी होने के कारण चंबा-तीसा मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। करीब सवा घंटे तक इस व्यस्त सड़क पर आवाजाही पूरी तरह ठप रही, जिससे यात्रियों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और राहत कार्य में जुट गए। बाद में एक ट्रैक्टर को बुलाया गया। काफी मशक्कत और सावधानी के साथ ट्रैक्टर की मदद से बस को धीरे-धीरे सुरक्षित स्थान पर खींचा गया। बस बाहर निकलते ही सभी ने राहत की सांस ली और इसके बाद यातायात को बहाल किया जा सका।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरेला क्षेत्र लंबे समय से खतरे का सबब बना हुआ है। बारिश और बर्फबारी के दौरान यहां सड़क धंसना और भूस्खलन होना आम बात है। बावजूद इसके अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन केवल अस्थायी मरम्मत कर जिम्मेदारी से बचता रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस स्थान को सुरक्षित नहीं बनाया गया, तो भविष्य में यहां कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
मौसम विभाग द्वारा खराब मौसम के पूर्वानुमान के बीच प्रशासन ने वाहन चालकों को विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। खासतौर पर पहाड़ी और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में धीमी गति और सावधानी से वाहन चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
लोक निर्माण विभाग तीसा का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे अधिशाषी अभियंता जोगिंद्र शर्मा ने बताया कि सरेला में सड़क धंसने की सूचना विभाग को मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि उक्त स्थान को सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। तब तक वाहन चालकों से अपील की गई है कि वे पूरी सतर्कता के साथ इस मार्ग से गुजरें।