#हादसा
January 11, 2026
हिमाचल में पैराग्लाइडर हा*दसा: लैंडिंग के समय बिगड़ा संतुलन, पेड़ पर लटके पायलट और सैलानी
पर्यटक को सुरक्षित नीचे उतारा
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग के दौरान हो रहे हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कांगड़ा जिले में 6 जनवरी को पैराग्लाइडिंग के दौरान एक युवक की खाई में गिरकर मौत होने की घटना को अभी महज पांच दिन ही बीते थे कि अब कुल्लू जिले से एक और पैराग्लाइडिंग हादसे की खबर सामने आ गई है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने रोमांचक पर्यटन गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला जिला कुल्लू जिले की गड़सा घाटी में आज रविवार को पेश आया है। बताया जा रहा है कि गड़सा घाटी से उड़ान भरने के बाद पैराग्लाइडर कुछ समय तक सामान्य रूप से हवा में रहा। लेकिन जैसे ही लैंडिंग का समय आया, अचानक संतुलन बिगड़ गया। ग्लाइडर तय लैंडिंग स्थल तक नहीं पहुंच पाया और पास ही स्थित एक खेत में लगे ऊंचे पेड़ की शाखाओं में फंस गया।
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पेड़ से टकराते ही पैराग्लाइडर का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और वह अनियंत्रित होकर झूलने लगा। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और चारों तरफ चीख-पुकार सुनाई देने लगी। लोगों को किसी बड़े हादसे की आशंका होने लगी।
राहत की बात यह रही कि पायलट की सूझबूझ के चलते पर्यटक पूरी तरह सुरक्षित रहा। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, उड़ान के दौरान पायलट की पूरी कोशिश यही रही कि सैलानी को किसी तरह का नुकसान न हो, और वह इसमें सफल भी रहा। हादसा होते ही आसपास के ग्रामीण तुरंत मदद के लिए आगे आए और दोनों को सुरक्षित नीचे उतारा।
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हालांकि इस हादसे में गड़सा निवासी पायलट नीरज को शरीर में कुछ जगह चोटें आई हैं। घायल पायलट को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत स्थिर बताई है। हादसे की सूचना मिलते ही भुंतर थाना पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया।
पुलिस की टीम पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह दुर्घटना किन कारणों से हुई।
⦁ प्रशासन तीन प्रमुख बिंदुओं पर जांच को केंद्रित कर रहा है—
⦁ क्या हादसा अचानक बदले मौसम और तेज हवाओं की वजह से हुआ?
⦁ क्या पैराग्लाइडर में किसी तरह की तकनीकी खराबी थी, जिसके कारण उसका संतुलन बिगड़ा?
⦁ या फिर लैंडिंग के दौरान किसी मानवीय चूक ने हादसे को जन्म दिया?
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जिला पर्यटन विकास अधिकारी डॉ. रोहित शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने साफ तौर पर बताया कि अगर जांच में सुरक्षा नियमों की अनदेखी या किसी तरह की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, स्थानीय प्रशासन ने भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए पैराग्लाइडिंग साइट्स पर सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की जाएगी। इसके तहत साइट्स का सुरक्षा ऑडिट, पायलटों के प्रशिक्षण और संचालन प्रक्रिया को और सख्त करने को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं, ताकि रोमांचक पर्यटन सुरक्षित रूप से जारी रह सके।