#हादसा
January 16, 2026
हिमाचल: परिवार को बचाने दौड़ी थी मां, पर नहीं हुई सफल; आंखों के सामने जिंदा जले छह सदस्य
देखते ही देखते में श्मशान में बदल गया घर
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला में मनाए जाने वाले माघी पर्व की खुशियां इस बार छह लोगों की मौत के साथ खत्म हो गईं। सिरमौर जिला के नौहराधार क्षेत्र के तलांगना गांव में गुरुवार रात को एक घर में हुए भयानक अग्निकांड में छह लोग जिंदा जल गए। इस हादसे में अपनी मां के घर पतियों और बच्चों को लेकर पहुंची बेटियां जलकर राख खाक हो गईं।
बूढ़ी मां ने आग लगते ही परिवार को बचाने का भरसक प्रयास किया] लेकिन वह सफल नहीं हो सकी और उसकी आंखों के सामने दोनों बेटियां] दामाद और उनके बच्चे जलकर राख हो गए। हालांकि एक फैसले ने मामा भांजे की जान बचा ली। इस त्रासदी से पूरा गांव स्तब्ध है और पूरे गांव में ही माघी पर्व की खुशियां मातम में बदल गई हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, माघी पर्व मनाने के लिए दोनों बेटियां अपने-अपने परिवारों के साथ मां इंद्रा देवी के घर आई हुई थीं। घर में रात तक जश्न और खुशियों का माहौल था। लेकिन किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह खुशी कुछ ही घंटों में दुःख और सन्नाटे में बदल जाएगी।
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रात को कमरे में रखी अंगीठी से आग शुरू हुई, और फिर रसोई में रखे गैस सिलेंडरों के फटने से आग ने भयावह रूप ले लिया। अंदर सो रहे लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। आग की चपेट में आने से पास-पड़ोस के तीन खाली मकान और गोशाला भी जल गए।
इंद्रा देवी का बेटा विक्रम और तृप्ता और नरेश का बेटा सूजल रात में खाना खाने के बाद दूसरे गांव सोने चले गए थे। ये दोनों मामा-भांजे हैं। यही एक फैसला उनकी जिंदगी बचा गया। लेकिन घर में सो रहे बाकी सदस्य इस भयावह अग्निकांड से बच नहीं सके।
बता दें कि, कविता अपने तीन बच्चों और अपने पति लोकेंद्र के साथ मायके आई थीं। तृप्ता अपनी बेटी और पति नरेश के साथ मां के घर माघी मना रही थीं। रात लगभग ढाई बजे इंद्रा देवी की नींद टूट गई, जब उन्होंने कमरे से धुआं उठते देखा। घबराकर वह बाहर निकलीं और मदद के लिए शोर मचाने लगीं। लेकिन तब तक आग ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया था।
मां ने मदद के लिए दौड़ लगाई और चिल्लाई, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि उन्होंने अपनी बेटियों, दामाद और नाती-पोतों को बचाने का मौका ही नहीं पाया। मकान में रखे गैस सिलिंडर फट गए, जिससे आग और भी विकराल हो गई। देखते ही देखते घर पूरी तरह जलकर राख हो गया।
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इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई। जिसमे तीन मासूम बच्चे भी शामिल है। लोकेंद्र को स्थानीय लोगों ने किसी तरह खिड़की से बाहर निकाला, लेकिन वह गंभीर रूप से झुलस गए हैं। वहीं, गोशाला में बंधे पशु भी आग की चपेट में आ गए। एक मां के सामने उसकी पूरी दुनिया उजड़ गई। माघी की रात, जो खुशियों की होनी थी, गांव के लिए कभी न भूलने वाला काला सवेरा बन गई।
इस हादसे ने पूरे परिवार को उजाड़ दिया है। हादसे में खुमड़ा, चौपाल का रहने वाला लोकेंद्र (42) गंभीर रूप से घायल हुआ है। जबकि, हादसे में उसकी पत्नी औैर तीनों बच्चों की मौत हो गई है। मृतकों की पहचान-
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लोकेंद्र आग में लगभग 16 फीसदी तक झुलस गए हैं। उनके हाथ, पांव, सिर, मुंह और घुटनों में जलन हुई। उन्हें पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौहराधार में केवल मरहम-पट्टी देकर सोलन रेफर कर दिया गया। इसके बाद झुलसे व्यक्ति को करीब तीन से चार घंटे का रास्ता तय कर क्षेत्रीय अस्पताल सोलन लाया गया। यहां उन्हें सर्जरी और ईएनटी विशेषज्ञों द्वारा जांच के बाद वार्ड में भर्ती किया गया। अस्पताल में आने के बाद भी वह बार-बार घर जाने की जिद कर रहे थे। इस दौरान तहसीलदार और कांग्रेस जिलाध्यक्ष सोलन सुभाष वर्माणी भी अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।