#विविध

March 19, 2026

सुक्खू सरकार को देश की सर्वोच्च अदालत ने दिया बड़ा झटका, इन कर्मियों के हक में सुनाया फैसला

सुक्खू सरकार ने हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती

शेयर करें:

supreme Court

शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार को देश की सर्वोच्च अदालत ने बड़ा झटका दिया है। इससे पहले इसी मामले में सुक्खू सरकार को हिमाचल हाईकोर्ट ने आइना दिखाया था, लेकिन सुक्खू सरकार ने हिमाचल हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे डाली। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने भी अनुबंध कर्मचारियों से जुड़े इस मामले में सुक्खू सरकार को राहत देने के बजाय उसकी याचिका को ही खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले ने हजारों अनुबंध कर्मचारियों को राहत देते हुए साफ कर दिया है कि उनके सेवा अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट से सुक्खू सरकार को बड़ा झटका

राज्य सरकार ने हिमाचल हाईकोर्ट के 16 दिसंबर 2024 और 10 अक्टूबर 2025 के फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां भी उसे निराशा ही हाथ लगी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सरकार की याचिका को खारिज कर दिया और हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि अनुबंध कर्मचारियों की सेवाओं को वरिष्ठता और वेतन वृद्धि में गिनने के मुद्दे पर सरकार की दलीलें अदालत में टिक नहीं पाईं।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल में अल सुबह अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिरी थार ; प्रशिक्षु डॉक्टर की थमी सांसे

अनुबंध कर्मचारियों को बड़ी राहत

दरअसल इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ में हुई। यह मामला हिमाचल प्रदेश राज्य बनाम प्रियंका नागू से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से प्रदेश के हजारों अनुबंध कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। अब उनकी अनुबंध अवधि को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा, जिससे उनकी सेवा शर्तों, प्रमोशन और वेतन से जुड़े मामलों में सकारात्मक असर पड़ेगा।

हाईकोर्ट ने पहले ही दी थी कड़ी टिप्पणी

इससे पहले हिमाचल हाईकोर्ट ने भी सरकार की अनुबंध नीति पर सख्त रुख अपनाया था। अदालत ने साफ शब्दों में कहा था कि यदि विभागों में पद खाली हैं, तो कर्मचारियों को लंबे समय तक अनुबंध पर रखना एक तरह का शोषण है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि नियमों के तहत की गई नियुक्तियों में अनुबंध अवधि को वरिष्ठता और वेतन वृद्धि के लिए गिना जाना चाहिए।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल में फैला माफिया राज: BJP ने विधानसभा में किया प्रदर्शन; सुक्खू सरकार को बताया जिम्मेदार

सरकार की दलील सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

सुक्खू सरकार ने अपने बचाव में नए कानून और सेवा शर्तों का हवाला देते हुए फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उस तर्क को भी खारिज कर दिया। इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां से भी उसे राहत नहीं मिली। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन कुछ व्यापक कानूनी सवालों को भविष्य के लिए खुला रखा है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर और कानूनी बहस हो सकती है, लेकिन फिलहाल कर्मचारियों के पक्ष में स्थिति मजबूत मानी जा रही है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में नहीं मिल रहा सिलेंडर : विधानसभा में विधायकों के लिए लकड़ियों पर बन रहा खाना

सियासी और प्रशासनिक असर तय

इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत और प्रशासन दोनों पर असर पड़ना तय है। एक ओर जहां सरकार पर कर्मचारियों के हित में नीतिगत बदलाव का दबाव बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों में इस फैसले को लेकर राहत और संतोष का माहौल देखा जा रहा है। कुल मिलाकर हिमाचल हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से भी झटका मिलने के बाद सुक्खू सरकार के लिए यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती भी बन गया है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख