#हादसा
December 28, 2025
हिमाचल: 24 घंटे में दूसरा पैराग्लाइडर हा*द*सा, अब 80 फीट ऊंचाई से गिरा महाराष्ट्र का पर्यटक
पैराग्लाइडर पायलट के खिलाफ मामला दर्ज
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में रोमांच के नाम पर की जा रही साहसिक गतिविधियां अब खतरे की घंटी बनती नजर आ रही हैं। पिछले 24 घंटों में दो पैराग्लाइडिंग हादसों ने पर्यटन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर कांगड़ा जिले के विश्व प्रसिद्ध बीड़-बिलिंग में हुए हादसे में एक पैराग्लाइडर पायलट की दर्दनाक मौत हो गई] तो दूसरी ओर अब कुल्लू जिले की गड़सा घाटी से एक और बड़ा हादसा सामने आया है] जिसमें महाराष्ट्र का एक पर्यटक गंभीर रूप से घायल हो गया।
कुल्लू जिले के भुंतर के समीप गड़सा घाटी में पैराग्लाइडिंग के दौरान महाराष्ट्र से आए 24 वर्षीय पर्यटक दिव्य प्रजापति करीब 70 से 80 फीट की ऊंचाई से नीचे गिर गया। हादसा उस समय हुआ जब पर्यटक पैराग्लाइडिंग के लिए उड़ान भर रहा था। अचानक संतुलन बिगड़ने से ग्लाइडर अनियंत्रित हो गया और पर्यटक सीधे नीचे जा गिरा, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं।
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दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और अन्य पायलटों की मदद से घायल पर्यटक को उपचार के लिए कुल्लू अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी हालत को गंभीर देखते हुए उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया है। घायल की पहचान दिव्य प्रजापति पुत्र दिवेश, निवासी ठाणे (मुंबई, महाराष्ट्र) के रूप में हुई है।
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मामले की पुष्टि करते हुए एसपी कुल्लू मदन लाल ने बताया कि पुलिस ने घटना का संज्ञान ले लिया है। प्रारंभिक जांच में पैराग्लाइडिंग पायलट की लापरवाही सामने आई है, जिसके आधार पर उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस हादसे के कारणों की विस्तृत जांच कर रही है, साथ ही यह भी परखा जा रहा है कि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
गौरतलब है कि इससे पहले कांगड़ा जिले के बीड़-बिलिंग में टेंडम पैराग्लाइडिंग के दौरान तकनीकी खराबी आने से एक पैराग्लाइडर पायलट की जान चली गई थी, जबकि उसके साथ उड़ रहा पर्यटक बाल-बाल बच गया था। उड़ान के कुछ ही क्षणों बाद ग्लाइडर की लाइनों और विंग सिस्टम में खराबी आ गई थी, जिससे संतुलन बिगड़ गया और हादसा हो गया।
लगातार हो रहे इन हादसों ने हिमाचल प्रदेश में साहसिक पर्यटन की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। पर्यटन सीजन के बीच इस तरह की घटनाएं न केवल पर्यटकों की जान जोखिम में डाल रही हैं, बल्कि प्रदेश की पर्यटन छवि को भी नुकसान पहुंचा रही हैं। अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन पैराग्लाइडिंग समेत सभी साहसिक गतिविधियों के लिए सख्त नियम, तकनीकी जांच और प्रशिक्षित पायलटों की अनिवार्यता सुनिश्चित करे, ताकि रोमांच मौत का कारण न बने।