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April 3, 2025

वक्फ बिल पास हुआ तो हिमाचल में 25 फीसदी जमीन पर हो जाएगा सरकार का कब्जा

देवताओं के स्नान स्थल तक पर वक्फ का दावा

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himachal news

शिमला। शिमला के टूटीखंडी स्थित आईएसबीटी की जमीन पर वक्फ बोर्ड का दावा है। यही नहीं, कांगड़ा में गुप्त गंगा और ऊपरी हिमाचल के देवताओं के स्नान स्थल सूर्यकुण्ड पर भी वक्फ बोर्ड ने दावा कर रखा है। अब बुधवार देर रात लोकसभा में पारित केंद्र सरकार के वक्फ संशोधन बिल अगर गुरुवार को राज्यसभा में पास हो गया तो हिमाचल प्रदेश में वक्फ बोर्ड की 5343 संपत्तियों में से 25 से 30 फीसदी जमीनों पर सरकार का कब्जा हो जाएगा।

शिमला में 200 बीघा जमीन का दावा

फिलहाल, वक्फ की जमीनों के 20 फीसदी मामले विवादित हैं। मिसाल के लिए शिमला में सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार वक्फ बोर्ड की 70 बीघा जमीन है। लेकिन हिंदू संगठनों का दावा है कि बोर्ड ने करीब 200 बीघा जमीन कब्जाई हुई है, जो अधिकांश सरकारी जमीनें हैं।

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सरकारी जमीनों पर कब्जा

शिमला के टूटीखंडी में ही वक्फ की 46 बीघा जमीन बताई जाती है, जिसके दायरे में आईएसबीटी का एक हिस्सा आता है। कुछ मामलों में वक्फ की जमीनों को सरकारी जमीन पर कब्जे के रूप में भी देखा जाता है। मिसाल के लिए संजौली की एक मस्जिद, जिसके मालिकाना हक का मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

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किन्नौर को छोड़कर हर जिले में जमीनें

हिमाचल प्रदेश में किन्नौर जिले को छोड़कर बाकी सभी जिलों में वक्फ बोर्ड की जमीनें हैं। वक्फ की अधिकांश जमीनों पर कब्रिस्तान बने हुए हैं। कुछ मामले कोर्ट में भी चल रहे हैं। शिमला, सिरमौर और कांगड़ा में वक्फ की जमीनें ज्यादा हैं।

किसी भी जमीन पर दावे का हक

2013 के वक्फ संशोधन कानून में वक्फ बोर्ड को यह अधिकार मिला हुआ है कि वह किसी भी जमीन को अपने सर्वे के आधार पर वक्फ संपत्ति घोषित कर सकता है। सबसे ज्यादा संपत्ति 46 बीघा भूमि टुटीकंडी वार्ड के पांजड़ी क्षेत्र में है। इसके अलावा लक्कड़ बाजार में 7.41 और ताराहाल में 6.13 बीघा भूमि पर बोर्ड का मालिकाना हक है। प्रशासन के मुताबिक शिमला शहरी के सात सर्किल में करीब 11 मुहाल पर वक्फ बोर्ड की संपत्तियां हैं।

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बैमलाई में 3.16 बीघा सहित छोटा शिमला, बालूगंज, लोअर बाजार में करीब 10 बीघा जमीन पर वक्फ की संपत्तियां पंजीकृत हैं। संजौली में करीब 17.98 विस्वा जमीन वक्फ बोर्ड की है। अधिकतर संपत्ति हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड की हैं। इसके साथ में सुन्नी वक्फ बोर्ड और पंजाब वक्फ बोर्ड की भी संपत्तियां पंजीकृत हैं। चल-अचल संपत्तियों पर गौर करे तो कब्जाधारकों ने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में मकान, मस्जिद और दुकानों का निर्माण किया है।

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