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January 27, 2025
हिमाचल के लिए चुनौतियों से भरा होगा ये साल, सीएम सुक्खू भी जता चुके हैं चिंता; कैसे पार पाएंगे ?
कम होता राजस्व घाटा अनुदान और बढ़ती बेरोजगारी बनी पहाड़ की मुसिबत
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शिमला। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के लिए आर्थिक रूप से कई बड़ी चुनौतियां दरवाजा खोल कर इंतजार कर रही हैं। हिमाचल प्रदेश के लिए आने वाला समय आर्थिक लिहाज से बड़ी चुनौतियां लेकर आने वाला है। जिससे पार पाना हिमाचल की सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकर के लिए एक चुनौती से कम नहीं होगा। स्वयं सीएम सुक्खू ने भी यह माना है कि आने वाला समय आर्थिक लिहाज से काफी चुनातीपूर्ण रहने वाला है।
हिमाचल प्रदेश को हर साल मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान में कमी आ रही है। चार साल पहले हिमाचल प्रदेश को जो राजस्व अनुदान घाटा 10 हजार करोड़ से भी अधिक मिलता था, वह अब कम होते होते तीन हजार करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं जैसे जैसे हिमाचल के लिए राजस्व अनुदान घाटा में कमी आ रही है, वैसे वैसे ही प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। जिसने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के माथे पर भी चिंता की लकीरे खींच दी हैं।
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दरअसल हिमाचल सरकार को केंद्र सरकार की ओर से साल 2021 22 में राजस्व अनुदान घाटा (रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट) के रूप में 10 हजार 249 करोड़ रुपए मिले थे। वही साल 2023 24 में घटकर 6 हजार 258 करोड़ रुपए रह गया है। अगले वित्त वर्ष यानी 2024.25 में घट कर 3 हजार 257 करोड़ रुपए रह जाने का अनुमान है।
हिमाचल की सुक्खू सरकार की चिंता बढ़ाने में सिर्फ आर्थिक संकट ही नहीं है। बल्कि प्रदेश में साल दर साल बढ़ रही बेरोजगारों की संख्या भी एक बड़ा संकट है। प्रदेश के युवाओं को रोजगार मुहैया करवाना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। हिमाचल प्रदेश में मौजूदा वक्त में 4ण्4 फ़ीसदी बेरोजगारी दर है। वहीं सत्ता में आने से पूर्व कांग्रेस ने हर साल एक लाख रोजगार देने का वादा भी किया था। लेकिन अभी तक सरकार अपना वादा पूरा नहीं कर पाई है और प्रदेश में बेरोजगारों की दर बढ़ती जा रही है।
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हिमाचल के लिए केंद्र से कम होती मदद और घटते राजस्व अनुदान घाटे को लेकर सीएम सुक्खू भी चिंता जता चुके हैं। कांगड़ा जिला के बैजनाथ में पूर्ण राज्यत्व दिवस के मंच से सीएम सुक्खू ने स्वंय ही कहा था कि अगला वित्त वर्ष आर्थिक रूप से चुनौतियों भरा रहने वाला है। हालांकि सीएम सुक्खू ने यह भी कहा था कि प्रदेश की जनता के सहयोग और देवताओं के आशिर्वाद से कांग्रेस सरकार इन चुनौतियों पर आसानी से काबू पा लेगी।
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बता दें कि हिमाचल प्रदेश में कमाई के साधन काफी कम हैं। इसके विपरित सरकार के खर्चे कहीं अधिक हैं। यानी खर्च और कमाई में काफी अंतर है। प्रदेश सरकार की सालाना कमाई अधिकतम सोलह हजार करोड़ रुपए है और खर्च 27 हजार करोड़ रुपए सालाना है। सरकार का खर्च कमाई से डेढ़ गुना से भी अधिक है।
ऊपर से कर्ज का मर्ज विकराल है। इस मर्ज का अंदाजा आंकड़ों से लगता है। राज्य सरकार ने दो साल में 28 हजार करोड़ रुपए के करीब कर्ज लिया है। इसमें से 10 हजार करोड़ रुपए तो पिछले कर्जों के ब्याज चुकाने पर लगे हैं। पिछले कर्ज के मूलधन के रूप में सरकार ने 8 हजार करोड़ रुपए वापस किए हैं।