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October 6, 2026

हिमाचल : त्योहारी सीजन में पकवान फीके...राशन डिपुओं पर महंगी हुई चीनी, दाल-तेल भी गायब

बाजार से खरीदारना पड़ सकता है सामान, जेब पर पड़ेगा असर

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शिमला। त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन लेने वाले उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। सरकारी राशन डिपो में जरूरी खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

त्योहारी सीजन में जनता को झटका

प्रदेश के सरकारी गोदामों में उड़द की दाल और सरसों के तेल का स्टॉक खत्म होने की वजह से इन वस्तुओं की सप्लाई उचित मूल्य की दुकानों तक नहीं पहुंच पा रही है। वहीं, राशन डिपुओं में अब चीनी की कीमत में भी बढ़ोतरी कर दी गई है।

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अब महंगी मिलेगी चीनी

राशन कार्ड धारकों के लिए चीनी की कीमत में चार रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है। पहले APL टैक्सपेयर परिवारों को चीनी 48 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराई जा रही थी। अब इसके लिए 52 रुपये प्रति किलो चुकाने होंगे।

बजट पर पड़ेगा असर

कीमत में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब त्योहारों के कारण घरों में चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। दशहरा, दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान मिठाइयां, पकवान और अन्य खाद्य सामग्री तैयार करने में चीनी का इस्तेमाल अधिक होता है। ऐसे में चार रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी भले ही छोटी नजर आए।मगर अधिक मात्रा में खरीदारी करने वाले परिवारों के मासिक बजट पर इसका असर पड़ सकता है।

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दाल और तेल भी गायब

त्योहारी सीजन में लोगों को उम्मीद रहती है कि सरकारी राशन डिपो पर जरूरी वस्तुएं आसानी से उपलब्ध रहेंगी। मगर इस बार उड़द की दाल और सरसों के तेल की सप्लाई प्रभावित होने से उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। सरकारी गोदामों में स्टॉक उपलब्ध नहीं होने के कारण डिपो तक इन वस्तुओं की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

कई परिवारों को होगी परेशानी

इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाली वस्तुओं पर निर्भर रहते हैं। डिपो में सामान उपलब्ध नहीं होने पर लोगों को अगले सप्लाई चक्र का इंतजार करना पड़ रहा है।

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बाजार से खरीदारी करनी पड़ी तो बढ़ेगा खर्च

अगर सरकारी डिपो में उड़द की दाल और सरसों के तेल की आपूर्ति जल्द बहाल नहीं होती है, तो उपभोक्ताओं को इन वस्तुओं की जरूरत पूरी करने के लिए खुले बाजार का रुख करना पड़ सकता है। बाजार में कीमतें सरकारी राशन व्यवस्था की तुलना में अधिक होने के कारण इसका सीधा असर परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ेगा।

त्योहारी सीजन में महंगाई का बोझ

त्योहारों के दौरान पहले ही कपड़े, मिठाई, पूजा सामग्री और अन्य जरूरी सामान पर खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में राशन डिपो से मिलने वाली दाल और तेल भी बाजार से खरीदने की नौबत आती है तो परिवारों का कुल खर्च और बढ़ सकता है।

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उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता

राशन उपभोक्ताओं का कहना है कि महंगाई के दौर में सरकारी राशन व्यवस्था परिवारों के लिए बड़ी राहत का काम करती है। ऐसे में जरूरी खाद्य वस्तुओं की सप्लाई में किसी तरह की रुकावट परेशानी बढ़ा देती है। उपभोक्ताओं की मांग है कि डिपो में दाल और तेल की उपलब्धता जल्द सुनिश्चित की जाए, ताकि त्योहारों के दौरान उन्हें बाजार से महंगे दाम पर सामान खरीदने के लिए मजबूर न होना पड़े।

 

खास तौर पर त्योहारी सीजन में राशन डिपो पर सामान की नियमित उपलब्धता जरूरी मानी जा रही है। एक ओर चीनी की कीमत बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर उड़द की दाल और सरसों तेल की उपलब्धता प्रभावित होने से उपभोक्ताओं के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है।

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सप्लाई बहाल होने का इंतजार

अब उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि सरकारी गोदामों में उड़द की दाल और सरसों के तेल की नई खेप कब पहुंचती है और डिपो तक इसकी सप्लाई कब बहाल होती है। अगर आपूर्ति जल्द सामान्य होती है तो उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। लेकिन देरी की स्थिति में त्योहारों के बीच बाजार से खरीदारी करने वाले परिवारों की संख्या बढ़ सकती है और उनके खर्च पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

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