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September 11, 2025
हिमाचल: पानी साफ है या गंदा- घर बैठे लग जाएगा पता, अब महज 3 रुपये में होगी जांच
अब आम लोग जान पाएंगे पानी की गुणवत्ता
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के NIT हमीरपुर ने एक पेपर स्ट्रिप का निर्माण किया है। इस स्ट्रिप के जरिए पानी की गुणवत्ता का पता चल सकेगा। इस स्ट्रिप की कीमत सिर्फ कीन रूपये है। कीमत बेहद कम होने के चलते अब आम लोग भी पानी की गुणवत्ता जांच पाएंगे।
इस स्ट्रिप का निर्माण NIT हमीरपुर के रसायन विभाग ने किया है। शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने फल और सब्जी के रस से बने मॉलिक्यूलर और नैनो सेंसर तकनीक पर यह पेपर स्ट्रिप तैयार की है। गौर करने वाली बात है कि पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों की पहचान के साथ मोबाइल एप की मदद से धातुओं की मात्रा भी पता लगाई जा सकेगी।
ये ऐसी तकनीक है जिसके जरिए आसानी से पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों की पहचान की जा सकती है। जैसे तांबा, लोहा, एल्युमिनियम, क्रोमियम, पारा और कोबाल्ट। NIT के सहायक प्राध्यापक डॉ. कल्याण सुंदर घोष के मार्गदर्शन में हमीरपुर की शोधार्थी शिवानी शर्मा और अंकिता शर्मा ने यह शोध किया है।
इस स्ट्रिप की जांच के लिए एक ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है जो स्ट्रिप के बदले हुए रंग से ये बता सकता है कि टेस्ट किए पानी में आयरन, क्रोमियम जैसे धातुएं कितनी मात्रा में हैं। मौजूदा समय में वायु के साथ जल प्रदूषण भी कैंसर जैसी घातक बीमारियां की वजह बन रहा है। ऐसे में ये पानी की हानिकारक धातुओं की पहचान करने का आसान तरीका है।
इस तकनीक के जरिए अब आम लोग भी एक साधारण स्ट्रिप की मदद से मिनटों में ये जान सकेंगे कि पानी सुरक्षित है या नहीं। हानिकारक तत्वों की मात्रा का पता लगाने के लिए रेड ग्रीन ब्लू (आरजीबी) स्केल तकनीक का प्रयोग किया गया है। इसके लिए क्लोरीमीटर एप प्रयोग की गई है।
आरजीबी वेल्यू को चेक करने के बाद पानी में धातुओं की मात्रा स्पष्ट हो सकेगी। शोधकर्ताओं ने ऐसे मॉलिक्यूलर और नैनो सेंसर तैयार किए हैं, जो पानी में धातु आयरन मिलते ही रंग बदल लेते हैं। यही सेंसर कार्बन डॉट्स के रूप में पेपर स्ट्रिप में मौजूद होंगे। स्ट्रिप के रंग में बदलाव स्मार्टफोन कैमरा और एप के जरिए तुरंत मापा जा सकता है।