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August 19, 2025
हिमाचल: शिव भक्तों के लिए बुरी खबर, 11 दिन पहले बंद हुई किन्नर कैलाश यात्रा; जानें कारण
बारिश, भूस्खलन और खराब मौसम ने रोकी आस्था की राह
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किन्नौर। हिमाचल प्रदेश में श्रद्धालुओं और शिव भक्तों के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आई है। हर साल सावन के महीने में आयोजित की जाने वाली कठिन और पवित्र किन्नर कैलाश यात्रा को इस बार समय से 11 दिन पहले ही स्थगित कर दिया गया है। जिला प्रशासन किन्नौर ने यह फैसला खराब मौसम, लगातार हो रही भारी बारिश, भूस्खलन, गहरी धुंध और अन्य खतरनाक पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखते हुए लिया है।
बता दें कि आज भी किन्नर कैलाश यात्रा पर गए एक श्रद्धालु की मौत हो गई है। आज मंगलवार को कैलाश यात्रा पर जा रहे श्रद्धालु पर पहाड़ी से बड़ा पत्थर गिर गया। जिससे श्रद्धालु की मौत हो गई। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया है। शव को नीचे लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मृतक श्रद्धालु गौरव कुमार उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का रहने वाला था और किन्नर कैलाश यात्रा पर निकला था।
जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 34 के तहत यह निर्णय लिया है, जिसमें किसी भी आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। प्रशासन ने साफ कहा है कि यात्रा मार्ग अत्यधिक जोखिमपूर्ण हो चुका है और श्रद्धालुओं की जान को सीधा खतरा है। इस निर्णय की जानकारी देते हुए डीसी किन्नौर अमित कुमार ने कहा कि यह निर्णय एहतियातन तौर पर लिया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि से बचा जा सके। यात्रियों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है।
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गौरतलब है कि किन्नर कैलाश यात्रा 15 जुलाई से आरंभ हुई थी और इसे 30 अगस्त तक चलना था, लेकिन अब इसे 19 अगस्त को ही रोक दिया गया है। प्रशासन द्वारा जारी नोटिस के अनुसार यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को सुरक्षित रास्तों से वापस लौटने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे सरकारी आदेशों का पालन करें और किसी भी तरह का जोखिम न उठाएं।
इस वर्ष की यात्रा पहले ही काफी मुश्किल भरी रही है। अब तक पांच श्रद्धालुओं की मौत इस यात्रा के दौरान हो चुकी है, जिसमें अधिकतर मौतें थकान, ऑक्सीजन की कमी और खराब स्वास्थ्य के चलते हुईं। यात्रा का अंतिम चरण अत्यधिक कठिन है, जहां ऑक्सीजन की कमी और तीव्र चढ़ाई यात्रियों की परीक्षा लेती है।
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किन्नर कैलाश जिसे हिन्दू धर्म में भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है हर साल हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। मान्यता है कि यहीं पर देवी पार्वती ने तपस्या की थी, और यह स्थान शिव.पार्वती के मिलन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। किन्नर कैलाश के पास स्थित पार्वती कुंड भी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्व रखता है। यात्रा की शुरुआत तांगलिंग गांव से होती है और कुल मिलाकर 14 किलोमीटर लंबा ट्रैक तय करना होता है। यह रास्ता बेहद कठिन हैए जिसमें कई जगहों पर खड़ी चढ़ाईए पत्थरों वाले मार्ग और ऑक्सीजन की कमी यात्रियों के लिए चुनौती बन जाती है।
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अब जबकि यात्रा समय से पहले ही स्थगित हो चुकी है, श्रद्धालुओं को अगली यात्रा के लिए अगले वर्ष का इंतजार करना होगा। प्रशासन ने संकेत दिया है कि भविष्य में मौसम के मिजाज को देखते हुए ही यात्रा की योजना तैयार की जाएगी। इस निर्णय से श्रद्धालुओं को भले ही निराशा हुई हो, लेकिन उनके जीवन की रक्षा को देखते हुए यह एक आवश्यक और जिम्मेदारी भरा कदम माना जा रहा है।