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April 30, 2025

हिमाचल: आज रिटायर हो रहे 1500 कर्मचारियों को मिलेगा कम्युटेशन, CM सुक्खू का ऐलान

आगे क्या होगा, इस पर कैबिनेट लेगी फैसला

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himachal news

शिमला। आज बुधवार को रिटायर हो रहे हिमाचल प्रदेश के 1500 कर्मचारियों को कम्युटेशन अलाउंस मिलेगा या नहीं, इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति दूर हो गई है। CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐलान किया है कि फिलहाल सभी कर्मचारियों को कम्युटेशन अलाउंस मिलेगी। लेकिन आगे क्या होगा, इस पर 5 मई को होने वाली कैबिनेट की मीटिंग में फैसला किया जा सकता है।

कैबिनेट में होगा विचार

आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश की कमजोर आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट सब कमेटी इससे पहले सरकार को कम्युटेशन अलाउंस बंद करने की सिफारिश कर चुकी है।

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कम्युटेशन अलाउंस के तहत कर्मचारी अगर चाहे तो एडवांस में पेंशन का 40 प्रतिशत हिस्सा ले सकता है। CM ने कहा कि कैबिनेट सब कमेटी की सिफारिशों को उन्होंने देखा है, लेकिन इस पर फैसला तो कैबिनेट ही लेगी। कैबिनेट में इस मसले पर विचार किया जाएगा।

इसलिए है कम्युटेशन का टेंशन

इस समय हिमाचल सरकार हर माह करीब 800 करोड़ रुपए पेंशन के रूप में खर्च करती है। राज्य में 1.89 लाख पेंशनर्स हैं। इसके अलावा सरकार पर हर महीने 1200 करोड़ रुपए का बोझ सैलरी के रूप में भी होता है। इस तरह सरकार की प्रतिमाह देनदारी 2000 से 2100 करोड़ रुपए की हो जाती है, जिसके लिए इस साल जनवरी से सरकार करीब हर महीने कर्ज ले रही है।

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सुक्खू सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में सैलरी और पेंशन का हिस्सा 45 फीसदी रखा है। ऐसे में अगर हर महीने रिटायर होने वाले कर्मी पेंशन का 40 फीसदी हिस्सा एडवांस में मांगें तो सरकार का पूरा बजट गड़बड़ा सकता है। इसी को देखते हुए सब कमेटी ने कम्युटेशन को खत्म करने की सिफारिश की है।

रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने पर भी है पेंच

कैबिनेट सब कमेटी ने रिटायरमेंट की उम्र को भी 58 से बढ़ाकर 59 साल करने का सुझाव दिया है। इससे सरकार पर रिटायर होने वाले कर्मचारियों की देनदारी का बोझ एक साल के लिए टल सकता है। माना जा रहा है कि सुक्खू सरकार आगामी 5 मई को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इन दो अहम मुद्दों पर प्राथमिकता से चर्चा कर सकती है। पिछली वीरभद्र सरकार ने भी यही किया था। हालांकि, एक साल की राहत के बाद दूसरे साल सरकार पर पेंशन के रूप में देनदारियों का बोझ डबल हो सकता है।

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