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August 2, 2026
सावन 2026 : कल रखा जाएगा पहले सोमवार का व्रत, जानिए कैसे करें महादेव को प्रसन्न
पूजा से पहले स्नान कर लें संकल्प
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नई दिल्ल। हिंदू धर्म में पाठ-पूजा और व्रत को काफी महत्व दिया गया है। हर व्रत की अपनी एक अलग विधि और खासियत है। हिंदू धर्म में सावन के सोमवार का व्रत भगवान शंकर को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। मान्यता है कि सावन के सोमवार का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। साथ ही तरक्की के भी योग बनते हैं। कल रखा जाएगा सावन का पहला सोमवार व्रत। इस दौरान कुल चार सोमवार आएंगे।
पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026
सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा के साथ श्रद्धालु व्रत रखते हैं और मंदिरों में जाकर जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि इस पूरे महीने में भोलेनाथ की भक्ति करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
सावन के सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत या पूजा का संकल्प लें। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और पूरे श्रद्धा भाव से भोलेनाथ की आराधना करें।
पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत चढ़ा सकते हैं। भगवान शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय माना जाता है। बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि वह कटा-फटा न हो। पूजा में साफ और पूरे अक्षत यानी चावल का इस्तेमाल करें।
भगवान शिव की पूजा करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा श्रद्धालु महामृत्युंजय मंत्र का भी जाप कर सकते हैं। मान्यता है कि मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
सावन के सोमवार पर शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक भी किया जा सकता है। पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को मिलाया जाता है। इसके बाद श्रद्धा के साथ भगवान शिव का अभिषेक करें।
भगवान शिव को बेलपत्र के साथ शमी के पत्ते, मदार यानी आक के फूल और भांग भी प्रिय माने जाते हैं। सावन के सोमवार पर श्रद्धा के साथ इन चीजों को शिवलिंग पर अर्पित किया जा सकता है। पूजा करते समय साफ-सफाई और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें।
सावन के सोमवार पर ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है। महामृत्युंजय मंत्र है- ‘ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥’ श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार मंत्र जाप कर सकते हैं।