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January 31, 2026

हिमाचल के इस मंदिर में चोरी करने वाले हो जाते हैं अंधे- बाढ़ आने से पहले बजने लगती है सीटी

दुख दर्द दूर करती हैं मां  हाटकोटी

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Hatkoti Mata

शिमला। आज हम आपको हिमाचल प्रदेश के उस पावन और रहस्यमयी मंदिर के बारे में बताएंगे, जिसके साथ लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है और जहां हर पत्थर अपने आप में एक कहानी कहता है। हम बात कर रहे हैं माता हाटेश्वरी मंदिर की, जिसे लोग हाटकोटी माता के नाम से भी जानते हैं। यह मंदिर शिमला जिले की जुब्बल-कोटखाई तहसील के हाटकोटी क्षेत्र में स्थित है। पहाड़ों और हरियाली से घिरा यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अनोखी मान्यताओं और लोककथाओं के कारण भी खास माना जाता है।

दुख दर्द दूर करती हैं मां  हाटकोटी

स्थानीय लोगों का कहना है कि माता हाटकोटी अपने भक्तों की हर पुकार सुनती हैं और उनके जीवन से दुख-दर्द दूर करती हैं। यही वजह है कि यहां साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। खासकर नवरात्रों और मेलों के दौरान मंदिर में भारी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

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पांडवों से  संबंध रखता है मंदिर 

इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना बताया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इसका संबंध पांडवों से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में आए थे और उन्होंने यहां कुछ समय बिताया था। मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन अवशेष और संरचनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि यह स्थान सदियों पुराना है।

महिषासुर मर्दिनी के नाम से भी होती है मां की पूजा 

मंदिर के गर्भगृह में मां हाटकोटी की एक विशाल और आकर्षक मूर्ति स्थापित है। मूर्ति में माता महिषासुर का वध करती हुई दिखाई देती हैं। इसी कारण उन्हें महिषासुर मर्दिनी के नाम से भी पूजा जाता है। भक्तों की मान्यता है कि माता का दाहिना पैर आज भी जमीन के भीतर समाया हुआ है, जो इस मंदिर को और भी रहस्यमय बनाता है। माता के मंदिर के साथ ही परिसर में भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर भी मौजूद है, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं।

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जंजीरों में बांध कर रखा है कलश

माता हाटेश्वरी मंदिर में आने वाले लोगों का ध्यान सबसे पहले जिस चीज पर जाता है, वह है मंदिर के प्रवेश द्वार के बाईं ओर रखा गया एक विशाल कलश। स्थानीय भाषा में इसे चरू कहा जाता है। यह कलश जंजीरों से मजबूती से बांधकर रखा गया है, जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। इसे लेकर स्थानीय लोगों में एक बेहद रोचक मान्यता प्रचलित है।

बाढ़ आने पर सीटी आवाज निकालता है कलश 

लोककथाओं के अनुसार, जब भी पब्बर नदी में बाढ़ आने वाली होती है, तो यह कलश अपने आप जोर-जोर से आवाजें निकालने लगता है। कहा जाता है कि यह सीटी जैसी आवाजें भरता है और हिलने-डुलने लगता है, मानो वह वहां से भागने की कोशिश कर रहा हो। इसी डर से इसे जंजीरों से बांधकर रखा गया है, ताकि यह अपनी जगह से न जा सके।

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मंदिर चोरी करने वालों की हो जाती है आंखें अंधी  

यह भी कहा जाता है कि पहले मंदिर परिसर में ऐसे दो कलश हुआ करते थे। बताया जाता है कि उनमें से एक कलश मौका पाकर भाग निकला, जबकि दूसरे को मंदिर के पुजारी ने समय रहते पकड़ लिया और जंजीरों से बांध दिया। तभी से यह कलश आज तक उसी जगह पर बंधा हुआ है और मंदिर की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है और कहा जाता है कि इस मंदिर में चोरी करने वाले लोगों की आंखें अंधी हो जाती है।  

मंदिर आने वाले श्रद्धालु लौटता है माता का आशीर्वाद लेकर   

इन सभी मान्यताओं और कहानियों की वजह से माता हाटेश्वरी मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम माना जाता है। जो भी श्रद्धालु यहां एक बार दर्शन के लिए आता है, वह माता की कृपा और इस स्थान की दिव्यता को अपने साथ लेकर लौटता है।

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