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August 16, 2025

हिमाचल में यहां है यमराज का मंदिर, जहां चित्रगुप्त लिखते हैं कर्मों का लेखा-जोखा

अंदर जाने से डरते हैं लोग

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Yamraj Temple Bharmaur

चंबा। हिमाचल प्रदेश में कई मंदिर हैं। आमतौर पर लोग मंदिर के अंदर जाते हैं, भयमुक्त महसूस करते हैं, बिना किसी डर के माथा टेकते हैं। ऐसे में वो मंदिर खास हो जाता है जिससे लोग डरें, बाहर से ही माथा टेककर निकल जाएं। ऐसा ही एक मंदिर है हिमाचल के चंबा जिले में। ये मंदिर किसका है, क्यों लोग मंदिर के अंदर जाने से डरते हैं, आज आपको यही बताएंगे।

मृत्यु के देवता का मंदिर

आपने शिव के मंदिर देखे होंगे, विष्णु का मंदिर भी देखा होगा और ना जाने कितने देवी-देवताओं के मंदिर आपने देखे होंगे। अब सवाल ये है कि क्या आपने कभी यमराज का मंदिर देखा है या क्या कभी इसके बारे में सुना है। जी हां वही यमराज जो मृत्यु के देवता हैं। अगर आप इस बारे में नहीं जानते तो जान लीजिए हिमाचल में यमराज का मंदिर भी है।

 

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आत्मा के कर्मों का हिसाब

भरमौर में स्थित धर्मराज का मंदिर यमराज को समर्पित है। इस मंदिर में इंसानों का नहीं, आत्माओं के कर्मों का हिसाब होता है। इस मंदिर के बारे में रहस्य से भरी कुछ ऐसी मान्यताएं हैं जिनके चलते लोग इस मंदिर के अंदर जाने से डरते हैं। लोग मंदिर के बाहर से ही प्रणाम कर अपनी श्रद्धा भक्ति दिखाते हैं। बाहर से ही सिर झुकाकर आगे निकल जाते हैं।

चित्रगुप्त भी मौजूद हैं यहां

धर्मराज का ये मंदिर साधारण सा दिखता है लेकिन इसके पीछे की जो मान्यताएं हैं, वही इसे खास बना देती हैं। ऐसा माना जाता है कि जब भी किसी की मौत होती है तो यमदूत उसकी आत्मा को इसी मंदिर लाते हैं। यमराज खुद इस बात का फैसला करते हैं कि आत्मा नर्क जाएगी या स्वर्ग। सिर्फ यमराज ही नहीं, इस मंदिर में चित्रगुप्त भी मौजूद हैं।

 

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कमरे में नहीं है कोई मूर्ति

यमराज के मंदिर के अंदर एक कमरा है। ऐसा माना जाता है कि ये कमरा चित्रगुप्त का है। खास बात ये है कि इस कमरे में कोई मूर्ति नहीं है। हालांकि मान्यता ये है कि इसी कमरे में चित्रगुप्त आत्माओं के कर्मों का लेखा-जोखा पढ़ते हैं। यमदूत आत्माओं को इस कमरे में लाकर चित्रगुप्त के सामने खड़ा करते हैं जहां उनके पूरी जिंदगी के अच्छे-बुरे कर्म सामने आ जाते हैं।

यमराज की अदालत है यहां

चित्रगुप्त के इस कमरे के सामने एक और कमरा है। इसे यमराज की अदालत कहते हैं। इसी जगह पर बैठकर यमराज फैसला करते हैं कि आत्मा नर्क जाएगी या स्वर्ग। वहीं मंदिर के चारों ओर चार द्वार हैं। ऐसी मान्यता है कि ये सोने, चांदी, तांबे और लोहे से बने हैं। इनका जिक्र गरुड़ पुराण में भी होता है। आत्मा को किस दरवाजे से बाहर ले जाया जाएगा, ये उसके कर्म निर्धारित करेंगे।

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कर्मों के हिसाब से दरवाजा

अच्छे कर्म वाले सोने के द्वार से स्वर्ग जाएंगे जबकि पापी आत्मा लोहे के द्वार से नर्क भेजी जाएगी। रहस्यों और मान्यताओं के चलते लोकल लोग भी इस मंदिर के पास आने से हिचकते हैं। एक ऐसी अदालत जहां आदमी नहीं, आत्माएं पेश होती हों, उस अदालत से कोई भी डरेगा। अगर आप ऐसे रहस्यमय मंदिरों को लेकर उत्सुकता रखते हैं तो आपको यहां जरूर जाना चाहिए।

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