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March 23, 2026

हिमाचल: नवरात्र के चौथे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा - चमकेगा भाग्य, जानें शुभ मुहूर्त और सही पूजन विधि

नकारात्मक शक्तियों से करती है माता रक्षा

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Katyayani mantra

शिमला। चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इसी कड़ी में छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित होता है, जिनकी आराधना से शक्ति, साहस और विजय का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

नकारात्मक शक्तियों से करती है माता रक्षा

इस साल 24 मार्च को पड़ रहे नवरात्रि के छठे दिन भक्त विशेष रूप से मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य है, जो अपने भक्तों को नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करती हैं। यही कारण है कि इस दिन मंदिरों और घरों में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिलती है।

 

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कैसा है मां कात्यायनी का स्वरूप 

पूजा की बात करें तो इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ-सुथरे, विशेषकर लाल या नारंगी रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद मां कात्यायनी की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित कर उन्हें कुमकुम, अक्षत, फूल और चंदन अर्पित किया जाता है। घी का दीपक जलाकर विधिपूर्वक आरती की जाती है और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।

माता को प्रसन्न करने के लिए क्या लगाए भोग

भोग के रूप में मां कात्यायनी को शहद अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है। इसके अलावा खीर, फल और अन्य मीठे व्यंजन भी चढ़ाए जा सकते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया यह भोग देवी को प्रसन्न करता है और भक्तों की इच्छाएं पूरी करता है।

 

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इस मंत्र का 108 बार करें जाप 

इस दिन मंत्र जाप का भी विशेष महत्व बताया गया है। ॐ देवी कात्यायन्यै नमः जैसे मंत्रों का 108 बार जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास बढ़ता है। साथ ही, “या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता…” मंत्र का जाप भी विशेष फलदायी माना जाता है।

अविवाहित लड़कियों के लिए व्रत बन सकता है वरदान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की पूजा करने से न केवल भय और बाधाएं दूर होती हैं, बल्कि विवाह से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी होता है। इसलिए अविवाहित लड़कियां विशेष रूप से इस दिन व्रत और पूजा करती हैं।

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