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March 23, 2026
हिमाचल : बाबा बालक नाथ के दरबार में आस्था का सैलाब, 10 दिन में बिके 60 लाख के रोट
आस्था और कारोबार साथ-साथ, दियोटसिद्ध में रोट की धूम
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हमीरपुर। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में इन दिनों चैत्र नवरात्र मेलों के चलते आस्था का जनसैलाब उमड़ रहा है। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु रोजाना यहां पहुंचकर बाबा बालक नाथ के दर्शन कर रहे हैं। इसी आस्था का असर मंदिर परिसर के आसपास भी देखने को मिल रहा है, जहां बाबा जी के प्रिय प्रसाद ‘रोट’ की बिक्री ने नया आंकड़ा छू लिया है।
बताया जा रहा है कि चैत्र मेले के महज 10 दिनों में ही करीब 60 लाख रुपए का रोट बिक चुका है। मंदिर के आसपास करीब 60 दुकानों में यह प्रसाद तैयार और वितरित किया जा रहा है, जिसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है।
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बाबा बालक नाथ मंदिर में चढ़ाया जाने वाला ‘रोट’ केवल एक प्रसाद नहीं, बल्कि आस्था और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि बाबा बालक नाथ को मीठा रोट बेहद प्रिय है और सच्चे मन से चढ़ाया गया यह प्रसाद मनोकामनाएं पूर्ण करता है।
श्रद्धालु विशेष रूप से घर से या मंदिर के आसपास की दुकानों से रोट बनवाकर बाबा के चरणों में अर्पित करते हैं। कई लोग अपनी मनोकामना पूरी होने पर विशेष रूप से रोट चढ़ाने आते हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा बालक नाथ को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने बाल रूप में ही कठोर तपस्या की थी और आज भी वे अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। दियोटसिद्ध स्थित यह गुफा मंदिर सदियों पुराना है और यहां महिलाओं के लिए गुफा के भीतर प्रवेश वर्जित है, जो इस मंदिर की एक विशिष्ट परंपरा है।
चैत्र नवरात्र के दौरान हर साल यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस बार भी मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। सुबह से देर रात तक मंदिर परिसर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहती हैं।स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि इस बार रोट की मांग पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा है, जिससे उनका कारोबार भी अच्छा चल रहा है।
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दियोटसिद्ध में लगने वाला यह मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा सहारा है। रोट की बिक्री, दुकानों और अन्य गतिविधियों से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है।
इस तरह बाबा बालक नाथ का यह दरबार हर साल आस्था के साथ-साथ लोगों की रोजी-रोटी का भी केंद्र बन जाता है, जहां श्रद्धा और विश्वास के साथ-साथ जीवन का एक बड़ा चक्र भी चलता है।