#धर्म
November 23, 2025
हिमाचल में तीन देवियों का वह इकलौता मंदिर, जहां सामने से नहीं होते हैं माता के दर्शन
16वीं शताब्दी से जुड़ा है इसका इतिहास
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![हिमाचल में तीन देवियों का वह इकलौता मंदिर] जहां सामने से नहीं होते हैं माता के दर्शन Himachal Dev Bhoomi](/_next/image?url=https%3A%2F%2Fimages.news4himachal.in%2F150jpg_1763867531680.jpg&w=2048&q=75)
मंडी। हिमाचल प्रदेश देवी देवताओं की भूमि है। यहां कई ऐसे मंदिर हैं, जिनका सदियों पुराना इतिहास है। इन मंदिरों की अपनी अपनी कहानियां हैं, जिन्हें सुन कर लोगों की इनके प्रति श्रद्धा और भी ज्यादा बढ़ जाती है। आज हम आपको ऐसी ही एक देवी मां के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसका इतिहास 16वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। इस देवी का मंदिर हिमाचल के मंडी जिला में स्थित है। बड़ी बात यह है कि इस मंदिर में माता के दर्शन करने के लिए सामने के दरवाजे से जाना वर्जित है।
छोटी काशी के नाम से जाने प्रसिद्ध मंडी का एक ऐसा मंदिर भी है। जहां माता की पिंडी स्वरूपा मूर्तियों के दर्शन दरवाजे के सामने से दर्शन नहीं किए जाते हैं। कहानी 16वीं शताब्दी से शुरू होती है, जब राजा श्याम सेन इस पहाड़ी पर आए। कहा जाता है कि उसी मंदिर की पहाड़ी पर राजा को तीन कन्याओं के रूप में माता रानी के दर्शन हुए, लेकिन पल भर में वे गायब हो गईं।
उसी रात राजा को स्वप्न में माता ने दर्शन देकर यहां मंदिर बनाने का आदेश दिया। जब खुदाई हुई, तो तीन पिंडी स्वरूप—महाकाली, महासरस्वती और महालक्ष्मी—प्रकट हुईं। शुरुआत में मंदिर का दरवाजा ठीक सामने था, जैसे हर मंदिर में होता है। लेकिन कुछ समय बाद एक अजीब घटना सामने आई। सामने से दर्शन करते ही श्रद्धालु मूर्छित होने लगे।
कहा जाता है कि माता ने राजा को फिर से स्वप्न में दर्शन दिए और बताया कि उनका तेज इतना प्रचंड है कि सामने से दर्शन सभी के लिए संभव नहीं। उसी आदेश के बाद सामने वाला दरवाजा हमेशा के लिए बंद कर दिया गया और आज तक वहीं बंद है। अब दर्शन सिर्फ साइड वाले दरवाजे से ही होते हैं।
टारना माता मंदिर लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। साल भर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मंडी शिवरात्रि के दौरान तो भीड़ ऐसी होती है कि लंबी–लंबी कतारें लग जाती हैं। राज्यपाल, मुख्यमंत्री और बड़े-बड़े नेता भी इस मंदिर में माथा टेकने अवश्य आते हैं।