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October 18, 2026
हिमाचल में यहां दो दशक बाद हुआ महायज्ञ, गुर ने की देववाणी, परंपराएं निभाने का दिया संदेश
20 साल बाद हुआ महायज्ञ, सुख-समृद्धि का दिया आशीर्वाद
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी जिले के सराज क्षेत्र के पंजाई में शनिवार सुबह देव मार्कंडेय ऋषि और देव पुंडरीक ऋषि की मौजूदगी में महायज्ञ करवाया गया। यह महायज्ञ विश्व शांति, लोगों की भलाई और सुख-समृद्धि की कामना के लिए किया गया। इसमें देवभूमि हिमाचल समेत पूरे विश्व को आने वाले संकटों से बचाने की प्रार्थना की गई।
महायज्ञ पूरा होने के बाद दोनों देवताओं ने देववाणी के माध्यम से लोगों को देव परंपराओं का पालन करने और देव स्थलों की पवित्रता बनाए रखने का संदेश दिया। देववाणी में कहा गया कि सभी लोगों को अपने बुजुर्गों की ओर से बनाई गई परंपराओं और नियमों का सम्मान करना चाहिए।
देव पुंडरीक ऋषि के पुजारी सोहन लाल और देव मार्कंडेय ऋषि के गूर जय देव ने बताया कि महायज्ञ के बाद दोनों देवताओं ने देववाणी की। इसमें देव संस्कृति, परंपराओं और नियमों को बनाए रखने पर जोर दिया गया।
देववाणी के माध्यम से संदेश दिया गया कि आज की पीढ़ी को भी अपने बुजुर्गों की ओर से शुरू की गई परंपराओं को पूरी श्रद्धा के साथ निभाना चाहिए। देव स्थलों की पवित्रता बनाए रखना और देव संस्कृति का सम्मान करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
देव मार्कंडेय ऋषि और देव पुंडरीक ऋषि की मौजूदगी में करीब दो दशक बाद इस महायज्ञ का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य विश्व में शांति बनाए रखने, लोगों की भलाई और सभी के जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करना था।
स्थानीय देव मान्यता के अनुसार, देव मार्कंडेय ऋषि, देव पुंडरीक ऋषि के कुल पुरोहित हैं। इसी वजह से यह महायज्ञ देव मार्कंडेय ऋषि सुनारू की ओर से करवाया जाता है। दोनों देवताओं की मौजूदगी में हुए इस महायज्ञ का स्थानीय देव संस्कृति और परंपराओं में खास महत्व है।
महायज्ञ के बाद दोनों देवताओं ने देववाणी के माध्यम से वर्षों से चली आ रही देव मिलन की परंपरा को आगे भी जारी रखने का संदेश दिया। देववाणी में कहा गया कि जब भी दोनों देवताओं की ओर से देव मिलन का आदेश दिया जाए, तो दोनों हारियों के देवलुओं को इसका पालन करना होगा।
देव मिलन की इस परंपरा को बनाए रखना जरूरी बताया गया। साथ ही देवताओं के आदेश और पुरानी मान्यताओं की अनदेखी न करने का संदेश भी दिया गया।
इस महायज्ञ में करीब 1200 से 1500 लोगों ने हिस्सा लिया। लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार हर परिवार की ओर से एक से दो किलो अनाज चढ़ाया। यह अनाज देव मार्कंडेय ऋषि को समर्पित किया गया है।
अब इस अनाज को देव मार्कंडेय ऋषि की पवित्र भूमि सुनारू ले जाया जाएगा। लोगों ने अनाज चढ़ाकर अपनी आस्था प्रकट की और महायज्ञ में भाग लेकर विश्व शांति व जनकल्याण की कामना की।