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March 16, 2026
हिमाचल में है 5000 साल पुराना देवदार का उल्टा पेड़, टुंडा राक्षस से जुड़ा है इसका इतिहास; जानें
केलो के नाम से जाना जाता है यह पेड़
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कुल्लू। प्रकृति की गोद में बसा हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी पौराणिक कहानियों और आस्था से जुड़े स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां की हर घाटी, हर पहाड़ और हर नदी के साथ कोई न कोई कथा जुड़ी हुई है, जो सदियों से लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र बनी हुई है। यही कारण है कि इस प्रदेश को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है।
ऐसी ही एक कहानी है कुल्लू जिले के हलाण क्षेत्र की, जहां एक उल्टा खड़ा देवदार का पेड़ है। इसे स्थानीय लोग “केलो” कहते हैं। यह पेड़ देखने में बहुत अनोखा है क्योंकि यह जमीन से नहीं बल्कि जड़ों के बल खड़ा दिखाई देता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसकी उम्र लगभग 5000 साल बताई जाती है।
बता दें कि यह मंदिर जिला कुल्लू के हलाण के कुम्हारटी क्षेत्र में है कहानी के अनुसार, हलाण इलाके के देवता वासुकी नाग ने किसी शक्ति की परीक्षा लेने के लिए इस देवदार को जमीन से उखाड़कर उल्टा खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि इस पेड़ को सुबह तक सूखने नहीं दिया जाए। लेकिन चमत्कार हुआ पेड़ सूखा नहीं, बल्कि उसकी जड़ें हरी-भरी हो गईं और उनमें नए कोपलें निकल आईं। यह अद्भुत दृश्य आज भी लोगों को हैरान करता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, उस समय हलाण क्षेत्र में टुंडा नामक राक्षस आतंक फैला रहा था। आसपास के सभी देवी-देवता उसे काबू नहीं कर सके, तो उन्होंने वासुकी नाग से मदद मांगी। वासुकी नाग ने कहा कि टुंडा की शादी टिबंर शाचकी से करवा दी जाए। टिबंर शाचकी ने अपनी शर्त रखी कि साल में एक बार वह उल्टे पेड़ के पास आएगी और इस दौरान उसका सारा खाना-पीना वहीं पहुंचा दिया जाएगा।
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हालांकि, शादी के बाद भी टुंडा राक्षस नहीं माना। अंत में वासुकी नाग ने उसे इस उल्टे देवदार के पास बांध दिया। तभी से लोग मानते हैं कि यह पेड़ केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं बल्कि पौराणिक महत्व का भी प्रतीक है।
आज भी हलाण में फाल्गुन महीने में फागली मेला मनाया जाता है। इस मेले में टुंडा राक्षस का पात्र शामिल होता है और परंपरा के अनुसार इसे खेल-खिलवाड़ और नृत्य के माध्यम से निभाया जाता है।
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स्थानीय लोगों का मानना है कि जब हलाण इलाके में कोई प्राकृतिक विपदा आती है, तो देवता इस उल्टे पेड़ पर बिजली गिराकर इलाके की रक्षा करते हैं। यही वजह है कि यह पेड़ न केवल धार्मिक और पौराणिक महत्व रखता है, बल्कि लोगों के लिए सुरक्षा और आस्था का प्रतीक भी है।
इसके अलावा, मनाली और क्लाथ के बीच जंगल में एक और विशाल देवदार का पेड़ है जिसे जमलू केलो कहा जाता है। इसका व्यास लगभग 21 फुट और ऊंचाई करीब 75 फुट है। यह पेड़ भी लगभग 5000 साल पुराना माना जाता है और देखने में छतरी जैसा लगता है। इसे देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से आते हैं। हलाण का उल्टा देवदार और जमलू केलो सिर्फ पेड़ नहीं हैं, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर और पौराणिक परंपरा का हिस्सा हैं।