#धर्म

November 17, 2025

देवभूमि हिमाचल में 54 साल बाद इन देवता के दरबार में होगा शांत महायज्ञ, करोड़ों होंगे खर्च

54 साल बाद होने जा रहा महायज्ञ का आयोजन

शेयर करें:

Himachal Pradesh

शिमला। देवभूमि हिमाचल के लोग देवी-देवताओं को अपने जीवन का अभिन्न अंग मानते हैं। यहां हर गांव का अपना स्थानीय देवता या देवी होती है। जिला शिमला के कई भागों में लोगों द्वारा क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए महायज्ञ आयोजित किए जाते हैं।  कुछ समय पहले रोहड़ड की स्पैल वैली में ऐसा ही एक भूंडा महायज्ञ आयोजित किया गया था, जिसकी लागत 100 करोड़ बताई गई। अब जुब्बल क्षेत्र में भी एक ऐसा ही महायज्ञ होने जा रहा है। 

54 साल बाद महायज्ञ का आयोजन

यह भव्य धार्मिक आयोजन जिला के जुब्बल तहसील के झड़ग गांव में  देवता साहिब नागेश्वर महाराज के मंदिर में भव्य शांत महायज्ञ में शुरु होगा। इस आयोजन का बजट करीब 50 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इसमें हजारों की संखया में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: युवक ने 'डॉलर' कमाने का देखा था सपना, शातिर ने एक लाख लेकर कर दिया चकनाचूर

2 साल से हो रही है महायज्ञ की तैयारी 

महायज्ञ के आयोजन की जिम्मेदारी 18 गांवों के लोगों ने मिलकर संभाली है। ग्रामवासी पिछले दो वर्षों से लगातार इस आयोजन की पूरी व्यवस्था, धार्मिक प्रक्रिया, देवताओं की अगवानी और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बनाने में जुटे हुए हैं।

महायज्ञ में होंगी 8 बड़ी शक्तियां शामिल

इस भव्य आयोजन में क्षेत्र की 8 बड़ी देव शक्तियां शामिल होंगी।

⦁    धौंलू महाराज, तंदाली
⦁    गुडारू महाराज, छुपाड़ी के खूंद
⦁    जागा माता, अढाल
⦁    हाटकोटी माता
⦁    क्षेत्र की सभी बटोलियां
⦁    पलस राम महाराज, पारसा
⦁    जोउटा खूंद, मंढोल
⦁    शलान गांव के बकरोदा

इन देव शक्तियों का आगमन ही इस महायज्ञ को और पवित्र और दिव्य बनाता है

यह भी पढ़ें : हिमाचल : हेलमेट नहीं, नंबर प्लेट भी गायब- पुलिस देख भगाई बाइक, कटा तगड़ा चालान

इस दिन होगी महायज्ञ की शुरूआत

इस भव्य महायज्ञ की शुरुआत 4 दिसंबर को संघेड़ा रस्म के साथ होगी। इसके बाद 5 दिसंबर को शिखा फेर का मुख्य आयोजन होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। वहीं 6 दिसंबर को उछड़-पाछड़ की पवित्र रस्म के साथ यह शांत महायज्ञ विधिवत संपन्न होगा।

54 साल बाद होगा महायज्ञ

बता दें कि देवता नागेश्वर महाराज के मंदिर में आखिरी शांत महायज्ञ 1971 में हुआ था। देवता नागेश्वर महाराज को मां काली का पुत्र माना जाता है। यही कारण है कि उनके रथ पर लगाए गए मुख्य मुखौटे में मां काली का प्रतीकात्मक रूप होता है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख