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November 20, 2025

हिमाचल : इन मां के दर पर पत्थर मात्र टकराने से पूरी होती है अरदास, 350 साल पुराना है मंदिर

बाहरी राज्य से दर्शन के लिए आते हैं चौहान वंश के लोग

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Himachal News

हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश की पावन धरती पर बसे हर मंदिर की अपनी अलग पहचान और समृद्ध इतिहास है, जो भक्तों की गहरी आस्था से जुड़ा हुआ है। इन्हीं में से एक है एक अनोखा मंदिर, जहां भक्त न केवल दर्शन करने आते हैं, बल्कि यहां मात्र पत्थरों को आपस में टकराकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता भी रखते हैं।आज हम आपको इसी अद्भुत विश्वास और परंपरा से जुड़े इस पवित्र मंदिर की रोचक कहानी बताएंगे।

12 भाइयों के साथ पहाड़ों में बसने आई थी एक बहन 

इतिहास के अनुसार, लगभग 300 वर्ष पहले जब दिल्ली पर मुगलों का शासन था, तब राजपूतों पर अत्याचार बढ़ गए थे। धार्मिक उत्तपीड़ना से बचने के लिए 12 भाई इस पहाड़ी में बसने आ गए। उनके साथ एक बहन भी थी। जिन्हें सुनाई नहीं देता था। 

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यहां की थी माता टौणी देवी ने तपस्या

कहानी के अनुसार, जब मंदिर की आधारशिला रखी गई तो वहां से खून की धारा निकलने पर सभी चकित रह गए। कुल पुरोहित ने इसे घर की कुंवारी कन्या टौणी देवी से संबंधित बताया। आरोपों से दुखी होकर टौणी देवी ने यहां कठोर तप किया और आषाढ़ माह की 10वीं तिथि को अंतर्ध्यान हो गई। उनकी स्मृति में भाइयों ने छोटा मंदिर बनाया, जो समय के साथ भव्य रूप ले चुका है।

पत्थरों को आपस में टकराते से होती है मन्नतें पूरी

लोगों का कहना है कि मन्नतें पूरी होने पर की मान्यता आज भी यहां गुंजती है। कहा जाता है कि क्योंकि माता को सुनाई नहीं देता था, इसलिए श्रद्धालु अपनी मनोकामना व्यक्त करते समय यहां रखे पत्थरों को आपस में टकराते हैं।

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दर्शन के लिए आते हैं चौहान वंश के लोग

माता के दर्शन करने के लिए चौहान वंश के लोग पंजाब हरियाणा, दिल्ली, राज्यस्थान, जम्मू कश्मीर व उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों से आते हैं। बाहरी राज्य से दर्शन  के लिए आते हैं चौहान वंश के लोग। 

मंदिर में होती है ये व्यवस्था 

⦁    टौणी देवी मंदिर की सीढ़ियाँ सीधे एनएच-70 से लगी हुई हैं।
⦁    पहली मंजिल पर माता टौणी देवी, साई बाबा, बाबा बालकनाथ और शनिदेव के मंदिर स्थित हैं।
⦁    दूसरी मंजिल पर भगवान शिव और हनुमान की विशाल प्रतिमाएँ स्थापित हैं।
⦁    मंदिर के साथ बड़ा सराय हाल और आकर्षक पार्क भी बनाया गया है, जहाँ भक्त बैठते हैं।
⦁    रात में ठहरने के लिए भी उचित प्रबंध मौजूद हैं।

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नवरात्र में लगता है भक्तों का तांता

नवरात्र शुरू होने से पहले ही मंदिर की सफाई और भंडारे की तैयारियाँ पूरी कर ली जाती हैं। मंदिर कमेटी के प्रधान धर्म सिंह के अनुसार, हर वर्ष  श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं। उपायुक्त मदन चौहान ने बताया कि नवरात्रों के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किया जाता है। पुलिस की तैनाती बढ़ाई जाती है ताकि किसी भी तरह की आपत्तिजनक सामग्री को मंदिर परिसर में ले न ले जा सके।  

आस्था का प्रतीक है ये मंदिर 

350 वर्षों से अधिक पुराना यह मंदिर न केवल चौहान वंश की कुलदेवी का पावन धाम है, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है। हर वर्ष यहां लगने वाला मेला और नवरात्रों की विशेष भीड़ इस बात का प्रमाण है कि मां टौणी देवी का दिव्य आशीर्वाद आज भी लोगों के जीवन में नई ऊर्जा भरता है।

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