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February 22, 2026

हिमाचल: बाबा बालक नाथ ने किया चमत्कार, जन्म से गूंगा बच्चा 6 साल बाद लगा बोलने; परिवार ने जताया आभार

जन्म से गूंगा छह साल बाद लगा बोलने, परिवार ने चढ़ाई चांदी की जीभ

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Baba Balak Nath

शाहतलाई (हमीरपुर): देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश के मंदिरों में समय.समय पर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जो श्रद्धालुओं की आस्था को और गहरा कर देती हैं। पहाड़ों की वादियों में बसे इन तीर्थस्थलों पर लोग विश्वास, उम्मीद और प्रार्थना लेकर पहुंचते हैं और कई बार ऐसी अनुभूतियां लेकर लौटते हैं जिन्हें वे चमत्कार मानते हैं। इसी तरह का एक प्रसंग हिमाचल के हमीरपुर जिला में स्थित सिद्ध पीठ शाहतलाई में सामने आया है, जहां एक छह वर्षीय बच्चा, जो जन्म से बोल नहीं पाता था, अब बोलने लगा है। परिजन इसे बाबा की कृपा मान रहे हैं और मन्नत पूरी होने पर उन्होंने चांदी की जीभ अर्पित कर कृतज्ञता जताई।

 

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कई बड़े अस्पतालों में करवााय इलाज

जानकारी के अनुसार पंजाब के जालंधर निवासी यह परिवार पिछले वर्ष चैत्र मास के मेलों के दौरान बाबा बालक नाथ की तपोस्थली पहुंचा था। उनका बेटा जन्म से ही नहीं बोल पाता था। परिवार ने कई बड़े अस्पतालों में बेटे का इलाज करवाया, लेकिन उन्हें हर तरफ से निराशा ही हाथ लगी। थक हार कर वह बाबा बालक नाथ के दर पर पहुंचे और यहां मंदिर के पंडित को अपनी व्यथा सुनाई। पंडित ने परिवार को बाबा के दर अरदास करने की सलाह दी। पंडित ने खुद मंदिर में विशेष अरदास करवाई और बेटे के लिए प्रार्थना की।

 

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धीरे.धीरे गूंजे पहले शब्द

परिवार का कहना है कि अरदास के कुछ समय बाद बच्चे में बदलाव दिखने लगा। पहले हल्की आवाजें, फिर टूटे.फूटे शब्द और देखते ही देखते वह बोलने लगा। जब बच्चे के मुंह से स्पष्ट शब्द निकले, तो घर में मानो उत्सव सा माहौल बन गया। करीब 11 महीने बाद परिवार दोबारा शाहतलाई पहुंचा। उन्होंने बाबा के चरणों में शीश नवाया, लंगर सेवा की और मन्नत के रूप में चांदी की जीभ अर्पित की।

पुजारी ने जताया विश्वास

मंदिर के पुजारी का कहना है कि श्रद्धालु ने पहले ही फोन पर सुखद समाचार साझा किया था। उनके अनुसार सच्चे मन से की गई प्रार्थना व्यर्थ नहीं जाती। बाबा के दरबार में आने वाला हर भक्त अपने विश्वास के साथ लौटता है। बता दें कि  शाहतलाई देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। विशेषकर चैत्र और सावन मास में यहां भारी भीड़ उमड़ती है। धार्मिक अनुष्ठान, भजन.कीर्तन और लंगर सेवा यहां निरंतर चलती रहती है।

 

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यह ताजा घटना एक बार फिर उस विश्वास को मजबूत करती है, जिसके सहारे लोग कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद का दीप जलाए रखते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि आस्था और भरोसे का जीवंत अनुभव है।

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