#राजनीति
January 16, 2026
अपने विभाग से मतलब रखें विक्रमादित्य.. खड़गे से मिलने के बाद CM सुक्खू की PWD मंत्री को फटकार
सीएम बोले- अधिकारियों पर सवाल खड़े करना ठीक नहीं
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नई दिल्ली/शिमला। हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान को लेकर जारी सियासी घमासान अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सख्त टिप्पणी तक पहुंच गया है। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के बाद सीएम सुक्खू का रुख और कड़ा नजर आया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि विक्रमादित्य सिंह अपने विभाग तक सीमित रहें और अधिकारियों को लेकर दिए गए बयान पूरी तरह गलत हैं।
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान पहले सीएम सुक्खू ने विवाद को तूल न देने की कोशिश की और कहा कि प्रदेश में सभी आईएएस और आईपीएस अधिकारी बेहतर काम कर रहे हैं, किसी तरह का टकराव नहीं है।
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उन्होंने दोहराया कि सबसे पहले देश है, उसके बाद राज्य, और अधिकारी उसी भावना से काम कर रहे हैं। लेकिन अगले ही दिन शिमला में मुख्यमंत्री का लहजा बदला हुआ नजर आया। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि अधिकारियों पर सवाल खड़े करना ठीक नहीं है और ऐसे बयान सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।
इस बीच शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर विक्रमादित्य सिंह के समर्थन में सामने आए। उन्होंने विक्रमादित्य को एक सक्षम मंत्री बताते हुए कहा कि किसी एक बयान को सामान्यीकृत नहीं किया जाना चाहिए।
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रोहित ठाकुर ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करें, ताकि भ्रम और शंकाओं का समाधान हो सके। उनका कहना था कि बाहर से आए आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का भी प्रदेश के विकास में अहम योगदान रहता है, हालांकि प्रदेश के अधिकारियों की जिम्मेदारी नैतिक रूप से और ज्यादा होती है।
वहीं, सीएम सुक्खू की सख्ती के बाद साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी नेतृत्व इस पूरे विवाद से असहज है। माना जा रहा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने कड़ा संदेश दिया। इससे पहले भी डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री, मंत्री जगत सिंह नेगी, अनिरुद्ध सिंह और राजेश धर्माणी विक्रमादित्य सिंह के बयान से दूरी बना चुके हैं या उसे गलत ठहरा चुके हैं।
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गौरतलब है कि 12 जनवरी को विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यूपी और बिहार से आए कुछ अधिकारियों पर हिमाचल के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया था। विवाद बढ़ने पर उन्होंने अपने बयान पर कायम रहने और जरूरत पड़ने पर नाम सार्वजनिक करने की बात भी कही थी। इसके बाद आईपीएस और आईएएस एसोसिएशन ने भी आपत्ति जताई थी।