#राजनीति
November 19, 2025
सुक्खू सरकार VS चुनाव आयोग : नई पंचायत गठन के आए 23 प्रस्ताव, SEC ने लगाई रोक
सरकार–कमीशन आमने-सामने, सीमाएं फ्रीज
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर सरकार और राज्य चुनाव आयोग के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग को कुल 23 प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनमें शिमला, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिलों के उपायुक्तों द्वारा भेजी गई सिफारिशें शामिल थीं।
विभाग ने इन सभी प्रस्तावों की जांच करके उन्हें राज्य सरकार के पास अंतिम निर्णय के लिए भेज दिया है। लेकिन इसी बीच राज्य चुनाव आयोग ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के एक प्रावधान को लागू करते हुए पंचायतों और शहरी निकायों की सीमाओं को ‘फ्रीज’ कर दिया है।
इसका मतलब है कि सरकार फिलहाल पंचायतों का पुनर्गठन या नई सीमाओं का निर्धारण नहीं कर सकती। हालांकि सरकार इस आदेश को चुनौती देने के लिए कानूनी राय ले रही है।
चुनाव आयोग के अनुसार, राज्य सरकार ने अभी कुछ ही महीने पहले पंचायतों और नगर निकायों का पुनर्गठन व सीमांकन पूरा किया था। इसी आधार पर आयोग ने मतदाता सूचियों का निर्माण शुरू किया। अब 3577 पंचायतों में से 3548 पंचायतों की वोटर लिस्ट लगभग तैयार हो चुकी है। आयोग का कहना है कि यदि अब फिर से सीमांकन हुआ तो पूरी प्रक्रिया दोबारा प्रारम्भ करनी पड़ेगी,
क्योंकि वार्डों की सीमाएं बदलते ही मतदाता मैपिंग नया करनी होती है। डिलिमिटेशन से लेकर अंतिम वोटर सूची तैयार होने तक लगभग 4-5 महीने लगते हैं। ऐसे में दोबारा पुनर्गठन का मतलब है कि आने वाले पंचायत और नगर निकाय चुनाव निर्धारित समय पर नहीं कराए जा सकेंगे, जो संविधान के अनुरूप अनिवार्य है।
1. पिछले वर्ष अक्टूबर में आयोग ने सरकार को मार्च 2025 तक सीमांकन पूरा करने के आदेश भेजे थे, जिसके बाद सरकार ने समय पर पुनर्गठन पूरा किया।
2. शहरी निकायों के लिए मई में आयोग ने विशेष आदेश जारी किया और सभी जिलों में समय पर बाउंड्री फिक्स की गई।
3. 3577 पंचायतों, 92 पंचायत समितियों, 12 जिला परिषदों और 73 नगर निकायों में से लगभग सारी इकाइयों का डिलिमिटेशन पूरा हो चुका है।
4. डिलिमिटेशन के बाद मतदाताओं की मैपिंग और ड्राफ्ट रोल प्रकाशित करने में लगभग ढाई से तीन महीने लगते हैं।
5. यदि सीमाएं फिर बदलीं, तो तय समय पर चुनाव कराना संभव नहीं होगा, जबकि कई पंचायतों व नगर निकायों का कार्यकाल जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच समाप्त होने वाला है।
इसलिए आयोग दिसंबर–जनवरी में एक साथ चुनाव करवाने की तैयारी में है और पिछले छह महीनों से इसी प्रक्रिया पर काम कर रहा है।
सीमाएं फ्रीज किए जाने के बावजूद कुछ ज़िलों के उपायुक्त आयोग के आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसे गंभीर मानते हुए राज्य चुनाव आयोग यह मुद्दा राज्यपाल के समक्ष उठाने पर विचार कर रहा है, क्योंकि राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं। चुनाव आयोग के पास स्वयं भी आदेश की अवहेलना पर कार्रवाई करने के अधिकार हैं, लेकिन चूंकि मामला राज्य के 12 जिलों के डीसी से जुड़ा है, इसलिए आयोग किसी कठोर कार्रवाई से पहले राज्यपाल को सूचित करने के विकल्प पर विचार कर रहा है।