#राजनीति
November 20, 2025
जयराम ठाकुर ने लुटाई 5 हजार बीघा जमीन- सुक्खू सरकार खोलेगी परतें, फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित
हिमाचल में जमीन आवंटन को लेकर सियासी टकराव तेज
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार अपने तीन साल के कार्यकाल से पहले ही एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक कदम की तैयारी में दिख रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आरोप लगाया है कि पूर्व भाजपा सरकार ने राज्य की लगभग 5,000 बीघा बहुमूल्य जमीन बेहद कम रकम पर उद्योगपतियों को आवंटित कर दी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अनुसार, अरबों रूपये की कीमत वाली जमीन को मात्र 1.12 करोड़ रुपए में दे दिया गया, जिससे राज्य को भारी नुकसान हुआ। 24 नवंबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में फैक्ट-फाइंडिंग कैबिनेट कमेटी गठित करने पर चर्चा होगी। यह कमेटी पूरे भूमि आवंटन प्रकरण की जांच करेगी और सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।
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कैबिनेट बैठक से ठीक पहले बद्दी में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा सरकार पर सबसे तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, पूर्व सरकार ने कस्टमाइज्ड इंडस्ट्रियल पैकेज के नाम पर स्टांप ड्यूटी माफ कर दी। पांच साल तक तीन रुपये प्रति यूनिट बिजली देने का वादा किया गया और पानी बिल्कुल मुफ्त। राज्य के संसाधनों को हम लुटने नहीं देंगे। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा खेल कुछ बड़े उद्योग घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने मेडिकल डिवाइस पार्क प्रोजेक्ट पर भी विपक्ष को कटघरे में खड़ा किया। उनका कहना था कि, केंद्र से मिले 30 करोड़ रुपये इसलिए वापस किए गए क्योंकि राज्य स्वयं अपने स्तर पर यह परियोजना विकसित करना चाहता है।
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भाजपा का आईटी व सोशल मीडिया सेल इसलिए हमला कर रहा है क्योंकि सरकार ने भ्रष्टाचार के रास्ते बंद कर दिए और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए योजनाएं लागू कीं। सीएम सुक्खू ने दावा किया कि पिछली भाजपा सरकार 75,000 करोड़ रुपए का कर्ज और कर्मचारियों से जुड़े 10,000 करोड़ रुपए के बकाया छोड़कर गई थी।
मुख्यमंत्री के इन आरोपों के तुरंत बाद भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने कहा, कांग्रेस सरकार राजनीतिक लाभ के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता को गुमराह कर रही है। भाजपा सरकार ने पारदर्शिता और बेहतर नीतियों के माध्यम से हजारों करोड़ का निवेश राज्य में लाया था। पूर्व उद्योग मंत्री ने यह भी कहा कि, पहाड़ी राज्यों में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए कुछ रियायतें देना आवश्यक होती हैं।
कांग्रेस सरकार की नीतिगत अनिश्चितता और बढ़े हुए बिजली दर ही उद्योगों के पलायन की असली वजह हैं। भाजपा शासनकाल में दिया गया प्रोत्साहन रोजगार निर्माण के उद्देश्य से था, जिसे कांग्रेस गलत तरीके से प्रस्तुत कर रही है।
कैबिनेट बैठक के बाद धर्मशाला के तपोवन में शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है, जहां यह मुद्दा निश्चित रूप से गरमाएगा। भाजपा पहले ही सुक्खू सरकार के तीन साल के कार्यकाल को लेकर आंदोलन की तैयारी में है, वहीं सरकार भी इस बार विपक्ष को कड़े स्वर में जवाब देने के मूड में दिखाई दे रही है।