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March 22, 2026

हिमाचल में पंचायतों का 'आरक्षण राज' खत्म, 2 बार के बाद सीट होगी ओपन!

सभी वर्गों को मिलेगा चुनाव लड़ने का समान अवसर!

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Himachal Panchayat Election

शिमला। हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों से पहले सरकार ने आरक्षण नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव का सीधा असर प्रदेश की 3700 से अधिक पंचायतों के चुनावी समीकरणों पर पड़ने वाला है। 

आरक्षण का '2 बार' वाला नया नियम

हिमाचल प्रदेश पंचायती राज विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना (संशोधन नियम, 2026) के अनुसार अब कोई भी पंचायत सीट किसी एक विशेष आरक्षित श्रेणी (जैसे SC, ST या OBC) के लिए लगातार दो बार से अधिक आरक्षित नहीं रहेगी। इसका मतलब ये है कि यदि कोई पंचायत पिछले दो चुनावों से किसी एक वर्ग के लिए रिजर्व थी, तो इस बार वो सीट 'ओपन' (अनारक्षित) हो जाएगी। सरकार का तर्क है कि इससे पंचायत स्तर पर आरक्षण में पारदर्शिता आएगी और अन्य वर्गों को भी चुनाव लड़ने का समान अवसर मिलेगा।

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31 मार्च तक जारी होगा नया रोस्टर

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार प्रदेश में पंचायत चुनाव 31 मई 2026 से पहले संपन्न होने हैं। इस समय सीमा को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों (DC) को सख्त निर्देश दिए हैं कि 31 मार्च तक हर हाल में नया आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक कर दिया जाए। हालांकि कई जिलों के DC ने पुराने नियमों के आधार पर तैयारी पूरी कर ली थी लेकिन अब कैबिनेट के इस ताजा फैसले के बाद उन्हें पूरी एक्सरसाइज नए सिरे से करनी होगी।

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किन पदों पर पड़ेगा असर ?

पंचायत चुनाव मुख्य रूप से पांच पदों के लिए होते हैं जिनमें से चार पर आरक्षण रोस्टर लागू होता है:

  1. पंचायत प्रधान
  2. वार्ड मेंबर
  3. पंचायत समिति सदस्य (BDC)
  4. जिला परिषद सदस्य

नोट: 'उप-प्रधान' का पद एकमात्र ऐसा पद है जिस पर कोई आरक्षण लागू नहीं होता, ये हमेशा ओपन रहता है।

एक महत्वपूर्ण शर्त: आरक्षण का कोटा

सरकार ने इस नियम में एक तकनीकी पेंच भी रखा है। यदि किसी विशेष श्रेणी (जैसे SC या ST) के लिए निर्धारित कुल आरक्षण प्रतिशत (कोटा) इस नए नियम की वजह से पूरा नहीं हो पा रहा है, तो उस स्थिति में 'दो बार' वाला नियम छोड़ा जा सकता है। यानी वहां आरक्षण जारी रखा जा सकेगा ताकि संवैधानिक कोटा प्रभावित ना हो।

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ये संशोधन पहले ड्राफ्ट के रूप में जनता के सामने रखा गया था जिस पर कोई आपत्ति ना मिलने के बाद अब इसे कानूनन लागू कर दिया गया है। इस बदलाव से उन उम्मीदवारों में खुशी है जो वर्षों से अपनी पंचायत सीट के 'ओपन' होने का इंतजार कर रहे थे। वहीं वर्तमान प्रतिनिधियों के लिए अपनी सीटें बचाए रखना अब एक बड़ी चुनौती होगी। 

 

प्रशासनिक स्तर पर अब जिला मुख्यालयों में रोस्टर तैयार करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है ताकि चुनावी प्रक्रिया समय पर शुरू हो सके।

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