#राजनीति
August 10, 2025
हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष पद की जंग तेज- इन नेताओं की बढ़ी टेंशन,दांव पर लगा भविष्य
वरिष्ठ नेताओं का भविष्य कार्यकारिणी पर निर्भर
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शिमला। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। कई वरिष्ठ नेता, जो विधानसभा चुनाव में हार का सामना कर चुके हैं, अब संगठन में अपनी भूमिका को लेकर बेचैन हैं। उनके समर्थक भी पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पार्टी की कार्यकारिणी में स्थान पाना इन नेताओं के लिए राजनीतिक जीवनरेखा साबित हो सकता है।
पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर, जो वीरभद्र सरकार में स्वास्थ्य और राजस्व जैसे अहम विभाग संभाल चुके हैं, लगातार दो चुनाव हार चुके हैं। उन्हें चुनाव के बाद कोई जिम्मेदारी नहीं मिली है। 2022 में उन्होंने खुद को मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे अनुभवी उम्मीदवार बताया था, लेकिन नतीजे उनके खिलाफ गए।
पूर्व वन मंत्री और पार्टी के उपाध्यक्ष रह चुके ठाकुर सिंह भरमौरी, भरमौर से चुनाव हारने के बाद अब अगले चुनाव में अपने बेटे को भरमौर से और खुद को भटियात से लड़ाने की घोषणा कर चुके हैं। वे भी किसी संगठनात्मक पद की प्रतीक्षा में हैं।
पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर ने ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत के तहत अपना पद छोड़ा था। अब वे कार्यकारिणी गठन में देरी और संगठन की कमजोरियों पर खुलकर सवाल उठा चुके हैं।
पूर्व मंत्री और कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल रह चुकीं आशा कुमारी को एक मजबूत और अनुभवी नेता माना जाता है। उनके समर्थकों का मानना है कि पार्टी को उनके अनुभव का लाभ लेना चाहिए। मंडी से पूर्व मंत्री रह चुके प्रकाश चौधरी भी संगठन में नई भूमिका की तलाश में हैं।
हर पक्ष अपने करीबी नेता को अध्यक्ष की कुर्सी दिलाने की कोशिश में जुटा है। कुछ नामों की खुलकर पैरवी हो रही है, तो विरोध भी सामने आ रहा है। राहुल गांधी ने संकेत दिया है कि इस बार जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के बजाय जनाधार वाले नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आलाकमान को सुझाव दिया है कि अध्यक्ष पद के लिए या तो मंत्री को चुना जाए या अनुसूचित जाति वर्ग से किसी नेता को मौका दिया जाए। वहीं, वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा है कि कार्यकारिणी गठन पर विस्तृत चर्चा हुई है और युवाओं को आगे लाने के साथ-साथ वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन भी जरूरी है।