#राजनीति
October 15, 2026
चुनाव से पहले हिमाचल BJP में हलचल : 68 सीटों पर सर्वे शुरू- जुटाई जाएगी दावेदारों की रिपोर्ट
31 अक्टूबर तक पहले चरण को पूरा करने की तैयारी
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने शुरुआती रणनीतिक तैयारी शुरू कर दी है। दिसंबर 2027 में होने वाले चुनाव से पहले पार्टी यह जानने में जुटी है कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कौन से नेता संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं और उनकी चुनावी स्थिति कैसी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस काम के लिए दिल्ली की एक एजेंसी को लगाया गया है, जो सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों से फीडबैक जुटा रही है।
बताया जा रहा है कि यह प्रक्रिया करीब दो महीने पहले शुरू हुई थी और अब तक 48 से अधिक सीटों पर सर्वे पूरा किया जा चुका है। इसमें टिकट के इच्छुक नेताओं की संख्या, उनके स्थानीय प्रभाव और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता जैसे पहलुओं को समझने की कोशिश की जा रही है। सर्वे के दौरान संबंधित क्षेत्रों के पत्रकारों और आम लोगों से संभावित उम्मीदवारों के बारे में राय ली जा रही है।
पार्टी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि किस नेता का अपने क्षेत्र में कितना जनाधार है और चुनावी मुकाबले में कौन बेहतर स्थिति में रह सकता है। सूत्रों के अनुसार, सर्वे को गोपनीय तरीके से अंजाम दिया जा रहा है, ताकि नेताओं के प्रभाव से फीडबैक प्रभावित न हो। प्रदेश भाजपा के कई नेताओं ने भी सर्वे चलने की बात स्वीकार की है, हालांकि इसकी पूरी प्रक्रिया और निष्कर्षों को लेकर आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
दरअसल, सर्वे करने वाली एजेंसी को 31 अक्टूबर तक पहले चरण का काम पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके बाद रिपोर्ट पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को सौंपी जाएगी। जानकारी के अनुसार, 10 नवंबर के बाद अगले चरण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
पहले चरण में जहां टिकट के दावेदारों और उनकी स्थानीय स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है, वहीं आगे के सर्वे में जीतने की संभावना यानी विनेबिलिटी पर अधिक ध्यान दिए जाने की बात कही जा रही है। इससे पार्टी को संभावित उम्मीदवारों के बीच तुलना करने में मदद मिल सकती है।
भाजपा के लिए टिकट वितरण की चुनौती उन क्षेत्रों में अधिक हो सकती है, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार मिली थी या बागी उम्मीदवारों ने चुनावी समीकरण प्रभावित किए थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, ऐसी कुछ सीटों पर 10 से 15 नेता तक टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।
फरवरी 2024 में कांग्रेस के छह पूर्व विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद संबंधित क्षेत्रों में भी उम्मीदवारों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने की बात सामने आ रही है। इन सीटों पर पहले से पार्टी के साथ जुड़े नेताओं और बाद में शामिल हुए नेताओं के बीच टिकट की उम्मीद को लेकर समीकरण महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
सर्वे का दायरा केवल मौजूदा भाजपा विधायकों तक सीमित नहीं है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके नेताओं के साथ-साथ दूसरे संभावित उम्मीदवारों की स्थिति भी जांची जा रही है। इससे पार्टी को प्रत्येक सीट पर उपलब्ध विकल्पों की जानकारी मिल सकती है। हालांकि, सर्वे में किसी नेता का नाम शामिल होने या उसकी स्थिति का आकलन किए जाने से यह तय नहीं होता कि उसे टिकट मिलेगा। भाजपा ने अभी उम्मीदवारों के चयन को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय घोषित नहीं किया है।
अगले विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन शुरुआती सर्वे से टिकट के दावेदारों की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। संभावित उम्मीदवार अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क तेज कर सकते हैं और स्थानीय मुद्दों के साथ संगठनात्मक गतिविधियों में अधिक सक्रिय नजर आ सकते हैं। कई दावेदारों वाली सीटों पर पार्टी के सामने स्थानीय नेताओं की महत्वाकांक्षाओं और संगठनात्मक समीकरणों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी रह सकती है।
सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में चल रही यह कवायद भाजपा को आगामी चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों की शुरुआती तस्वीर दे सकती है। सर्वे के अगले चरण में जुटाए जाने वाले फीडबैक से पार्टी की चुनावी तैयारी को दिशा मिलने की संभावना है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सर्वे के आधार पर टिकट वितरण में क्या बदलाव होंगे या किन नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा।