#राजनीति
November 21, 2025
सुक्खू सरकार में बड़ा कौन... "मंत्री या अधिकारी" पंचायत चुनाव में देरी पर भड़के राज्यपाल
चुनाव आयोग ने बंद लिफाफे में राज्यपाल को सौंपी रिपोर्ट, बोले हम चुनाव को तैयार
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज चुनाव अब एक राजनीतिक महासंग्राम का रूप ले चुके हैं। चुनाव को लेकर सुक्खू सरकार और राज्य चुनाव आयोग आमने.सामने खड़े हैं, और अब इस टकराव में प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला भी कूद पड़े हैं। पंचायत चुनाव में देरी और कानून.व्यवस्था की स्थिति पर राज्यपाल ने सुक्खू सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकती। राज्यपाल ने साफ कहा कि पंचायत चुनाव समय पर होना लोकतंत्र के लिए ज़रूरी है और सरकार को इस प्रक्रिया में बाधा नहीं बनना चाहिए।
प्रदेश में हाल ही में ऊना और सोलन जिलों में हुई गोलीबारी और हत्या के मामलों ने हिमाचल की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल को देवभूमि कहा जाता है। बढ़ती आपराधिक घटनाएं चिंताजनक हैं। सरकार प्राथमिकता के आधार पर हालात संभाले और देवभूमि की पवित्रता को बनाए रखे। राज्यपाल ने साफ कहा कि लगातार बढ़ती हिंसक वारदातें प्रदेश की शांत छवि पर धब्बा लगा रही हैं और सरकार को इस दिशा में सख्त कदम उठाने होंगे।
यह भी पढ़ें : प्रेम कुमार धूमल का आशीर्वाद लेकर विक्रमादित्य सिंह ने जयराम ठाकुर को दे डाली नसीहत
पंचायत चुनावों को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने सुक्खू सरकार को खुलकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि चुनाव अपने निर्धारित समय पर होने चाहिएए क्योंकि लोकतांत्रिक संस्थाओं को समय पर चुनाव कराना सरकार की जिम्मेदारी है। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि राज्य चुनाव आयुक्त अनिल खाची ने उन्हें बंद लिफाफे में इस पूरे विषय पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है और आयोग अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में रुका मतदाता सूचियों की छपाई का काम : 31 जनवरी तक कैसे होंगे पंचायत चुनाव?
राज्यपाल ने तंज कसते हुए पूछा कि जब एक तरफ मंत्री कह रहे हैं कि चुनाव समय पर होंगे और दूसरी तरफ उन्हीं मंत्रियों के अधीन काम करने वाले अधिकारी और सात जिलों के डीसी कह रहे हैं कि चुनाव कराना संभव नहीं, तो आखिर सरकार में बड़ा कौन है, मंत्री या अधिकारी।
बता दें कि सुक्खू सरकार ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि प्रदेश में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू होने और सड़कें पूरी तरह बहाल न होने के कारण पंचायत चुनाव तत्काल कराना मुश्किल है। सरकार का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद हालात सामान्य नहीं हुए, इसलिए चुनाव टालने का फैसला मजबूरी है। जबकि चुनाव आयोग का मानना है कि रोस्टर जारी करने सहित कई प्रक्रियाएं सरकार की वजह से लंबित हैं और अब चुनाव अपने तय समय पर होना बेहद कठिन होता जा रहा है। चुनावों की अवधि खत्म होने में अब ढाई महीने से भी कम समय बचा है और अभी तक रोस्टर जारी न होना इस पूरे विवाद को और गहरा कर रहा है।
प्रदेश की राजनीति में पंचायत चुनाव हमेशा से अहम रहे हैं, लेकिन इस बार चुनाव के आसपास पैदा हुआ यह विवाद प्रदेश सरकार, चुनाव आयोग और अब राज्यपाल को भी आमने.सामने खड़ा कर चुका है। इससे साफ है कि पंचायती राज चुनाव अब हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक टकराव का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुके हैं, जिसकी गर्माहट आने वाले दिनों में और बढ़ने वाली है।