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October 9, 2026
हिमाचल में कभी भी बज सकता है चुनाव का बिगुल! जयराम ठाकुर का दावा—स्थिर नहीं सुक्खू सरकार
जयराम ठाकुर बोले सुखविंदर सिंह सुक्खू सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री
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मंडी। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से बयानबाजी तेज होने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने करसोग में आयोजित पंचायत जनप्रतिनिधि सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की मौजूदा सरकार स्थिर नहीं है और हिमाचल में कभी भी चुनाव का बिगुल बज सकता है। जयराम ठाकुर ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के कई बड़े नेता और मंत्री भाजपा के संपर्क में हैं तथा आगामी चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ने की इच्छा जता रहे हैं।
हालांकि, कांग्रेस नेताओं के भाजपा में आने या समय से पहले चुनाव होने को लेकर जयराम ठाकुर के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उनके इस बयान ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। सम्मेलन में उन्होंने कार्यकर्ताओं और पंचायत प्रतिनिधियों से आगामी चुनावों के लिए अभी से जुटने का आह्वान किया।
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुक्खू की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान प्रदेश के विकास और जनहित के बजाय सत्ता में बने रहने पर केंद्रित है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री अपने फैसले मित्र मंडली की सलाह पर ले रहे हैं और इसका नुकसान प्रदेश की जनता को उठाना पड़ रहा है।
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नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद पूर्व भाजपा सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद कर दिया या उनमें बदलाव किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव के दौरान जनता से कई गारंटियां पूरी करने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
जयराम ठाकुर ने दावा किया कि प्रदेश की जनता अब सरकार से जवाब चाहती है और आगामी चुनाव में कांग्रेस को इसका राजनीतिक हिसाब देना पड़ सकता है। ये आरोप नेता प्रतिपक्ष ने सम्मेलन के दौरान लगाए। कांग्रेस सरकार का पक्ष इन बयानों में शामिल नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस संगठन और सरकार के भीतर गुटबाजी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसका असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ रहा है। उन्होंने मंत्रिमंडल की बैठकों के टलने या उनमें देरी होने को सरकार के भीतर समन्वय की कमी से जोड़ते हुए सवाल उठाए।
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जयराम ठाकुर के अनुसार, जब सरकार के भीतर ही तालमेल की कमी होगी तो विकास कार्यों और जनसमस्याओं के समाधान पर असर पड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित हैं और जनता को राहत देने के लिए जिस तेजी से फैसले होने चाहिए, वैसा नहीं हो रहा।
जयराम ठाकुर ने दावा किया कि हिमाचल कांग्रेस के कई कद्दावर नेता भाजपा के संपर्क में हैं, और अगले चुनाव में वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं
जयराम ठाकुर ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश पर करीब 51 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज बढ़ा है और राज्य का कुल कर्ज लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार आर्थिक तंगी का सामना कर रही है, तो विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को पर्याप्त गति क्यों नहीं मिल रही। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री कार्यालय पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का भी आरोप लगाया और इसे सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़कर सवाल खड़े किए।
कर्ज के आंकड़ों और मुख्यमंत्री कार्यालय पर खर्च को लेकर नेता प्रतिपक्ष के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। सम्मेलन में सरकार की वित्तीय नीतियां उनके निशाने पर रहीं और उन्होंने आर्थिक प्रबंधन को लेकर कांग्रेस से जवाब मांगा।
जयराम ठाकुर ने प्रदेश में सड़कों की स्थिति को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई कई सड़कों की बहाली में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई गई। उनके अनुसार, ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सड़कें खराब होने से लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि सड़कों की खराब स्थिति का असर आम जनता, किसानों, बागवानों और स्थानीय कारोबार पर पड़ता है। ऐसे में सरकार को राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर जमीनी समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए।
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नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस की चुनावी गारंटियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह देने के वादे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन उन्हें पूरा करने में सरकार अपेक्षित रूप से सफल नहीं रही।
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जयराम ठाकुर ने कहा कि चुनावी गारंटियों के आधार पर सत्ता में आई कांग्रेस को अब अपने वादों का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जनता के बीच सरकार को लेकर नाराजगी है और पंचायत स्तर पर सामने आए राजनीतिक रुझान आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
करसोग में आयोजित सम्मेलन के दौरान जयराम ठाकुर ने स्थानीय राजनीति पर भी फोकस किया। उन्होंने करसोग के विधायक दीपराज को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का चेहरा बताते हुए कार्यकर्ताओं से जीत का अंतर 20 हजार से अधिक करने का लक्ष्य लेकर काम करने का आह्वान किया।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने, लोगों के बीच सक्रिय रहने और सरकार की नीतियों को लेकर जनता के सामने अपनी बात रखने की अपील की। सम्मेलन में पंचायत जनप्रतिनिधियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित भी किया गया।
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जयराम ठाकुर ने पंचायत चुनावों में भाजपा को मिली सफलता को जनता के बदलते राजनीतिक रुझान का संकेत बताया। हालांकि, पंचायत चुनावों के नतीजे अपने आप में विधानसभा चुनाव के परिणाम तय नहीं करते।
सम्मेलन के दौरान जयराम ठाकुर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को अपने हिसाब से चलाना चाहती है। यह टिप्पणी उन्होंने कांग्रेस की राजनीति और संस्थागत कामकाज को लेकर अपनी आलोचना के संदर्भ में की।
करसोग में जयराम ठाकुर के बयान से साफ है कि भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस सरकार को आर्थिक स्थिति, चुनावी गारंटियों, विकास कार्यों और कथित गुटबाजी के मुद्दों पर घेरना शुरू कर दिया है। वहीं, प्रदेश में समय से पहले चुनाव होने और कांग्रेस के नेताओं के भाजपा में आने संबंधी दावे फिलहाल जयराम ठाकुर के राजनीतिक बयान हैं, जिनकी पुष्टि नहीं हुई है।
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अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और सरकार अपनी उपलब्धियों तथा आर्थिक स्थिति को लेकर क्या तथ्य सामने रखती है। फिलहाल, करसोग से उठे इन बयानों ने हिमाचल की राजनीति में चुनावी माहौल को लेकर चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।