#राजनीति
February 28, 2026
हिमाचल राज्यसभा सीट बनी प्रतिष्ठा की लड़ाई, सीएम सुक्खू कल जाएंगे दिल्ली; प्रत्याशी पर होगा फैसला
हिमाचल की राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस फूंक फूंक कर रख रही कदम
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए होने वाला चुनाव इस बार प्रदेश की राजनीति का सबसे अहम मुकाबला बनता जा रहा है। वर्ष 2024 के चुनाव में हुए राजनीतिक घटनाक्रम से सबक लेते हुए कांग्रेस अब पूरी रणनीतिक सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही है। पार्टी इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती और प्रत्याशी चयन को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रखने की नीति अपनाई जा रही है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का कल यानी रविवार को दिल्ली दौरा प्रस्तावित है। उनका यह दिल्ली दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर राज्यसभा प्रत्याशी के नाम पर विस्तृत चर्चा करेंगे। सूत्रों के मुताबिक अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान लेगा, लेकिन प्रदेश नेतृत्व की सहमति को भी निर्णायक माना जा रहा है।
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हिमाचल से राज्यसभा की एक सीट खाली होने जा रही है और इस पर कांग्रेस के भीतर दावेदारों की लंबी कतार बताई जा रही है। पार्टी के भीतर कम से कम पांच संभावित उम्मीदवारों के नाम चर्चा में हैं। संगठनात्मक संतुलन] राजनीतिक अनुभव और राष्ट्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार तय किया जाएगा। यही वजह है कि नाम को लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई संकेत नहीं दिया गया है।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इस बार नामांकन से ठीक पहले प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर सकती है। इसका मकसद विपक्ष को रणनीति बनाने का मौका न देना है। पिछली बार सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस को झटका लगा था] इसलिए पार्टी नेतृत्व इस चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रहा है।
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मुख्यमंत्री के दिल्ली से लौटने के बाद कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी। इसी बैठक में हाईकमान के फैसले से विधायकों को अवगत कराया जाएगा और चुनावी रणनीति तय होगी। पार्टी नेतृत्व क्रॉस वोटिंग जैसी किसी भी स्थिति से बचने के लिए पहले से ही राजनीतिक गणित मजबूत करने में जुटा है।
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया मार्च के पहले सप्ताह में पूरी होगी, जबकि मतदान 16 मार्च को प्रस्तावित है। यह सीट भाजपा सांसद इंदु गोस्वामी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हो रही है। मौजूदा विधानसभा गणित कांग्रेस के पक्ष में जरूर दिखाई देता है, लेकिन पार्टी इस बार कोई चूक नहीं चाहती।
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हिमाचल की यह एकमात्र राज्यसभा सीट अब केवल चुनाव नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि इस बार संगठनात्मक एकजुटता और रणनीतिक गोपनीयता के सहारे जीत सुनिश्चित की जाए। इसी कारण प्रत्याशी चयन को लेकर आखिरी क्षण तक सस्पेंस बनाए रखने की तैयारी चल रही है।