#राजनीति
February 25, 2026
हिमाचल में कच्ची सड़क की धूल खाकर झल्लाए अखिलेश यादव- सरकार पर कसा तंज, जानें
सोलन में रूके थे अखिलेश यादव- आज होगी वापसी
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सोलन। पहाड़ों की शांत वादियों से उठी एक सड़क की तस्वीर ने सियासी बहस को हवा दे दी। समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व CM अखिलेश यादव ने हिमाचल दौरे के दौरान एक कच्चे मार्ग का वीडियो साझा कर केंद्र सरकार पर तीखा सवाल दागा। धार्मिक यात्रा के बीच दिया गया यह बयान अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
हिमाचल में कांग्रेस पार्टी के राज के बीच अखिलेश यादव जिला सिरमौर के मरयोग स्थित गिरि गंगा बद्रिका आश्रम के निजी दौरे पर पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने यशवंत नगर-बद्रिका आश्रम संपर्क मार्ग की कच्ची सड़क का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया।
जब ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ बन सकती है तो आश्रमों को जोड़ने के लिए ‘सनातन सड़क योजना’ क्यों नहीं बनाई जा सकती?
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) February 24, 2026
इससे धर्म का मार्ग प्रशस्त होगा और सच्चे धर्म प्रधान लोगों को सत्संग के साथ-साथ, महाझूठ के इस शासनकाल में ‘सच-संग’ का भी पुण्यफल मिल सकेगा। pic.twitter.com/eeBRuvSYCb
हिमाचल से रवाना होने के बाद जारी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि जब ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ बन सकती है तो आश्रमों को जोड़ने के लिए ‘सनातन सड़क योजना’ क्यों नहीं बनाई जा सकती। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि इससे धर्म का मार्ग प्रशस्त होगा और सच्चे धर्म प्रधान लोगों को सत्संग के साथ-साथ ‘सच-संग’ का भी पुण्यफल मिल सकेगा।

मंगलवार सुबह करीब 9 बजे अखिलेश यादव आश्रम पहुंचे और बाबा ओम स्वामी से मुलाकात की। दौरा धार्मिक बताया गया, लेकिन इसे अत्यंत गोपनीय रखा गया। सिरमौर पुलिस के पास इस हाई-प्रोफाइल यात्रा का कोई आधिकारिक कार्यक्रम दर्ज नहीं था। भारी सुरक्षा के बीच वे पहुंचे और दोपहर लगभग 12 बजे उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हो गए। हालांकि यात्रा का उद्देश्य धार्मिक बताया गया, लेकिन सड़क को लेकर उठाए गए सवालों ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया।
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में बुनियादी ढांचे और धार्मिक स्थलों के विकास को लेकर लगातार दावे किए जा रहे हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ का उल्लेख करते हुए मौजूदा सरकार से तुलना की। उनके सवाल ने सोशल मीडिया पर समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस छेड़ दी है। कुछ लोग इसे विकास से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं तो कुछ इसे सियासी व्यंग्य मान रहे हैं।