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October 31, 2026

बड़ी खबर: सुक्खू सरकार ने 633 कर्मचारियों को दे दिया दिवाली का तोहफा, किए प्रमोट; चेतावनी भी दी

तय समय में कार्यभार नहीं संभाला तो अगली प्रमोशन को एक साल करना होगा इंतजार

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himachal teacher

शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले 633 शिक्षकों को प्रदेश की सुक्खू सरकार ने दिवाली से पहले बड़ा तोहफा दे दिया है। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे इन शिक्षकों को अब हेडमास्टर और हेडमिस्ट्रेस के पद पर प्रमोशन मिल गया है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेशों के बाद प्रदेश के सैकड़ों शिक्षकों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं।

 

विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी की सिफारिशों के आधार पर इन शिक्षकों को हेडमास्टर / हेडमिस्ट्रेस क्लास-II (नॉन गजटेड) के पद पर पदोन्नत किया गया है। पदोन्नति पाने वाले शिक्षकों को प्रदेश के विभिन्न सरकारी हाई स्कूलों में रिक्त पदों के विरुद्ध नई तैनाती भी दी गई है।

शिक्षा विभाग ने दिया प्रमोशन का तोहफा

शिक्षा विभाग ने विभागीय पदोन्नति समिति की सिफारिश के बाद 633 पात्र शिक्षकों की पदोन्नति को मंजूरी दी है। ये पदोन्नतियां संशोधित वेतन नियम-2022 के तहत लेवल-13 में की गई हैं। सरकार के इस फैसले से सरकारी शिक्षा विभाग में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। दिवाली से कुछ दिन पहले आए इस फैसले को शिक्षकों के लिए किसी बड़े उपहार से कम नहीं माना जा रहा है। पदोन्नति के साथ ही अब इन शिक्षकों को स्कूलों की प्रशासनिक और शैक्षणिक जिम्मेदारियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

 

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इन्हें मिला हेडमास्टर बनने का मौका

शिक्षा विभाग के आदेशों के अनुसार पदोन्नति का लाभ उन इन-सर्विस टीजीटी और प्रमोटी लेक्चरर को दिया गया है, जिन्हें 26 अप्रैल 2010 से पहले बिना विकल्प के पदोन्नत किया गया था। इसके अलावा संबंधित शिक्षकों को विभाग के 11 दिसंबर 2025 के निर्देशों के तहत हेडमास्टर पद पर पदोन्नति के लिए अपना विकल्प देना जरूरी था। निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले शिक्षकों को अब हेडमास्टर पद पर पदोन्नत कर प्रदेश के विभिन्न सरकारी हाई स्कूलों में रिक्त पदों के खिलाफ नियुक्त किया गया है। विभाग ने पदोन्नति आदेशों के साथ नई तैनाती को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 

 

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प्रमोशन के साथ चेतावनी भी

633 शिक्षकों को प्रमोशन की खुशखबरी देने के साथ ही शिक्षा विभाग ने उन्हें स्पष्ट चेतावनी भी दी है। पदोन्नत शिक्षकों को अपने नए तैनाती स्थल पर विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर पहुंचकर कार्यभार संभालना होगा। यदि नए स्कूल की दूरी 30 किलोमीटर या इससे कम है तो शिक्षक को एक दिन के भीतर ज्वाइन करना होगा। वहीं, 30 किलोमीटर से अधिक दूरी होने पर नए तैनाती स्थल पर कार्यभार संभालने के लिए पांच दिन का समय दिया गया है।

ज्वाइनिंग में देरी पड़ेगी भारी, एक साल तक नहीं मिलेगी प्रमोशन

शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर नए पद पर कार्यभार न संभालने वाले शिक्षकों को अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। ऐसे मामलों में पदोन्नति आदेश स्वतः वापस माने जाएंगे और संबंधित शिक्षक को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। आदेश के अनुसार, प्रमोशन आदेश एक साल या अगली डीपीसी, जो भी बाद में हो, तक वापस माने जाएंगे। यानी समय पर ज्वाइनिंग नहीं करने वाले शिक्षकों को अगले एक साल तक या अगली विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया तक पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सकेगा।

 

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रिलीव करने से पहले होगी शिक्षक के रिकॉर्ड की जांच

शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों और हेडमास्टरों को पदोन्नत शिक्षकों को तत्काल रिलीव करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, शिक्षक को रिलीव करने से पहले उसके सेवा रिकॉर्ड और पदोन्नति से संबंधित दस्तावेजों की पूरी तरह जांच करना अनिवार्य किया गया है। विभाग की ओर से कहा गया है कि संबंधित शिक्षक का नाम, वरिष्ठता क्रमांक और उसकी श्रेणी, जिसमें एससी, एसटी और सामान्य वर्ग शामिल हैं, की जांच की जाएगी। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पदोन्नति से संबंधित सभी शर्तें पूरी की गई हों।

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लेक्चरर और पीजीटी प्रमोशन को लेकर भी रखी गई अहम शर्तें

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि रिलीव करने से पहले यह जांचना जरूरी होगा कि संबंधित शिक्षक ने पहले लेक्चरर या पीजीटी पद के लिए विकल्प तो नहीं दिया था। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि वह 26 अप्रैल 2010 के बाद लेक्चरर या पीजीटी के पद पर पदोन्नत तो नहीं हुआ है। इसके अलावा, पदोन्नति प्राप्त करने वाले शिक्षक के खिलाफ कोई विभागीय जांच या विजिलेंस मामला लंबित नहीं होना चाहिए। यदि सेवा रिकॉर्ड में किसी प्रकार की समस्या सामने आती है तो संबंधित मामले की जांच और विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

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वेतन निर्धारण के लिए एक महीने के भीतर देना होगा विकल्प

हेडमास्टर पद पर पदोन्नत किए गए अधिकारियों को एफआर-22 के प्रावधानों के तहत वेतन निर्धारण के लिए भी निर्धारित समय सीमा का पालन करना होगा। जो शिक्षक विकल्प के आधार पर अपना वेतन निर्धारण करवाना चाहते हैं, उन्हें ज्वाइनिंग की तारीख से एक महीने के भीतर अपना विकल्प देना होगा। हेडमास्टर पद पर प्रमोट होने वाले लेक्चरर और पीजीटी को फीडर कैडर टीजीटी के आधार पर नियम-8 के तहत संबंधित लाभ मिलेंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वेतन निर्धारण से जुड़े मामलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा।

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सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी पदोन्नतियां

शिक्षा विभाग ने पदोन्नति आदेशों में यह भी स्पष्ट किया है कि ये प्रमोशन सुप्रीम कोर्ट और अन्य न्यायालयों में लंबित संबंधित मामलों के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे। इनमें एसएलपी (सिविल अपील) नंबर 010021/2025 सहित अन्य संबंधित न्यायिक मामलों का फैसला भी महत्वपूर्ण रहेगा। विभाग ने यह अधिकार भी सुरक्षित रखा है कि प्रशासनिक कारणों से इन पदोन्नतियों की समीक्षा की जा सकती है। यानी भविष्य में न्यायालय के आदेश या प्रशासनिक परिस्थितियों के अनुसार इन आदेशों में बदलाव संभव है।

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