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March 27, 2026
हिमाचल: अब नहीं चलेगी निजी स्कूलों की मनमानी, सुक्खू सरकार नियमों में कर रही बड़ा बदलाव
मनमर्जी से फीस बढ़ोतरी नहीं कर पाएंगे निजी स्कूल
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में अब निजी स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी। सुक्खू सरकार निजी स्कूलों की लूट को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने जा रही है। जिसके बाद निजी स्कूल मनमाने ढंग से फीस बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे। सुक्खू सरकार प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए बड़े कदम की तैयारी में है। निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने की शिकायतों के बीच सरकार नियमों में संशोधन करने जा रही है, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।
विधानसभा में इस मुद्दे पर जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्पष्ट किया कि सरकार अब निजी स्कूलों को मनमर्जी से फीस बढ़ाने की छूट नहीं देगी। इसके लिए मौजूदा नियमों में बदलाव किया जाएगा और अन्य राज्यों की तर्ज पर सख्त प्रावधान लागू किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक और हरियाणा जैसे राज्यों में पहले ही ऐसे नियम लागू किए जा चुके हैं, जहां निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी को नियंत्रित किया गया है। हिमाचल सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
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शिक्षा मंत्री ने बताया कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में वर्ष 1997 के तहत निजी स्कूलों की निगरानी तो की जाती है, लेकिन फीस निर्धारित करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। यही कारण है कि कई स्कूल अपनी मर्जी से फीस बढ़ा देते हैं। सरकार अब इस कमी को दूर करने के लिए संशोधन लाने जा रही है, जिससे फीस निर्धारण की प्रक्रिया को भी नियमों के दायरे में लाया जा सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी निजी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन कर अधिक फीस वसूली जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा मंत्री ने विधायकों से भी ऐसे मामलों की जानकारी साझा करने की अपील की है, ताकि समय रहते कदम उठाए जा सकें।
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शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। हालांकि, पहले इस योजना के प्रति जागरूकता की कमी के कारण दाखिले कम हो रहे थे। जिसके चलते सरकार द्वारा विशेष अभियान चलाने के बाद अब इन दाखिलों की संख्या में सुधार हुआ है और पहले जहां लगभग 650 बच्चे ही दाखिला ले पाए थे, अब यह संख्या दोगुनी हो गई है। फिर भी सरकार इसे और बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है।
विधायकों ने सुझाव दिया है कि बड़े निजी स्कूलों के बाहर सूचना पट लगाए जाएं, ताकि गरीब परिवारों को भी अपने अधिकारों की जानकारी मिल सके। सरकार ने इस दिशा में भी काम करने की बात कही है।