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July 2, 2026
हिमाचल: कलयुगी बेटे ने त*लवा.र से मौ*त के घाट उतार दी मां, अब सलाखों के पीछे कटेगी सारी जिंदगी
आरोपी बेटे ने मां पर कर दिए थे कई वार, मौके पर ही थम गईं थी बेचारी की सांसें
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। रिश्तों का कत्ल करने वाली यह खौफनाक वारदात सुनकर हर किसी की रूह कांप गई थी। यहां एक कलयुगी बेटे ने अपनी ही मां की तलवार के वार से हत्या कर दी थी। इंसानियत को शर्मसार करने वाले इस जघन्य अपराध में अदालत ने अपना कड़ा फैसला सुना दिया है।
अब आरोपी बेटे की सारी उम्र जेल में कटेगी। शिमला की जिला अदालत ने आरोपी बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-द्वितीय यजुवेंद्र सिंह की अदालत ने गवाहों और पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस खौफनाक हत्याकांड पर मुहर लगाते हुए दोषी को यह सजा मुकर्रर की है।
यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना वर्ष 2022 की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार 26 जुलाई 2022 की रात करीब 11:30 बजे जुन्गा क्षेत्र के थुंड गांव में यह खूनी खेल खेला गया। दोषी रामेश्वर ने अपने ही घर में अपनी मां बिमला देवी पर पुश्तैनी तलवार से जानलेवा हमला कर दिया। रामेश्वर ने मां के सिर, चेहरे, गर्दन और हाथों पर कई गहरे वार किए, जिससे बिमला देवी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस दौरान मां की चीख-पुकार सुनकर जब बड़ा भाई प्रकाश चंद उन्हें बचाने दौड़ा, तो खून के प्यासे रामेश्वर ने उस पर भी तलवार से हमला कर दिया, जिससे वह भी बुरी तरह घायल हो गया। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी और स्थानीय लोग भी इस वारदात से स्तब्ध रह गए थे।
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घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए और फोरेंसिक जांच भी करवाई गई। पुलिस द्वारा एकत्र किए गए वैज्ञानिक प्रमाण, घटनास्थल से बरामद सामग्री और फोरेंसिक रिपोर्ट ने आरोपी की संलिप्तता को मजबूत आधार प्रदान किया। जांच अधिकारियों ने अदालत में पर्याप्त साक्ष्य पेश किए, जिनके आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ी।
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सुनवाई के दौरान परिवार के सदस्यों और अन्य महत्वपूर्ण गवाहों ने अदालत के सामने घटना से जुड़े तथ्य रखे। प्रत्यक्षदर्शी गवाहों ने आरोपी को वारदात के समय घटनास्थल पर मौजूद बताया और पूरी घटना का विवरण दिया। अदालत ने गवाहों की गवाही को विश्वसनीय माना और कहा कि उनके बयानों में किसी प्रकार का विरोधाभास नहीं पाया गया। साथ ही मेडिकल और वैज्ञानिक रिपोर्टों ने भी अभियोजन पक्ष के दावों की पुष्टि की।
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मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को झूठा फंसाए जाने की दलील दी। हालांकि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का विश्लेषण करने के बाद इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मामले में प्रस्तुत सबूत इतने मजबूत हैं कि आरोपी की संलिप्तता को लेकर किसी प्रकार का संदेह नहीं बचता।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी को हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने सजा सुनाते हुए कहा कि किसी भी सभ्य समाज में मां जैसी पूजनीय रिश्ते के खिलाफ इस प्रकार का जघन्य अपराध अत्यंत गंभीर है और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है। इस फैसले को न्याय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है, जिसने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जघन्य अपराध करने वालों को कानून के तहत कठोर दंड से नहीं बचाया जा सकता।