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March 18, 2026

सुक्खू सरकार को शांता की नसीहत, बोले- पक्ष-विपक्ष के नेताओं की कमेटी बना रोकें फिजूलखर्ची

पानी की रॉयल्टी बढ़ाने की आवश्यकता

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Himachal Economy

कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने राज्य की मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए अपने सुझाव पेश किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार भारी कर्ज के दबाव में है और ऐसे में खर्चों में कटौती बेहद जरूरी हो गई है।

अपने कार्यकाल का दिया उदाहरण

दरअसल, उन्होंने हाल ही में कुछ नेताओं से कैबिनेट रैंक वापस लेने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कदम सराहनीय तो है, लेकिन यदि यह केवल सीमित समय के लिए है, तो इसकी मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। बकौल शांता कुमार, यदि बचत करनी है तो यह स्थायी और ठोस नीति का हिस्सा होना चाहिए, न कि अस्थायी राजनीतिक निर्णय।

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उन्होंने अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने छोटे-छोटे खर्चों में कटौती कर बड़ी बचत की थी, जिससे विकास कार्यों को गति मिली। उनका मानना है कि सरकार यदि गंभीरता से प्रयास करे तो सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर वित्तीय प्रबंधन संभव है।

पानी की रॉयल्टी बढ़ाने की आवश्यकता

पूर्व सीएम शांता कुमार ने सरकार को सुझाव दिया कि अनुभवी नेताओं की एक संयुक्त समिति बनाई जाए, जिसमें पक्ष और विपक्ष दोनों शामिल हों। यह समिति राज्य के खर्चों की समीक्षा करे और आय बढ़ाने के उपाय सुझाए, ताकि आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सके।

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ऊर्जा क्षेत्र पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल की जलविद्युत परियोजनाओं में पानी की रॉयल्टी बढ़ाने की आवश्यकता है। उनका तर्क है कि जब बिजली की कीमतें बढ़ी हैं, तो प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग का लाभ भी राज्य को अधिक मिलना चाहिए।

वित्तीय सुधारों के लिए बनाई जाए व्यापक रणनीति

इसके अलावा, उन्होंने शानन बिजली परियोजना जोगिंद्रनगर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि हिमाचल के संसाधनों से बनी इस परियोजना पर अधिकार किसी अन्य राज्य का होना अन्यायपूर्ण है और इसके लिए केंद्र सरकार से मजबूती से बात की जानी चाहिए। आखिर में उन्होंने सरकार से अपील की कि वित्तीय सुधारों के लिए व्यापक रणनीति बनाई जाए, जिसमें खर्चों पर नियंत्रण और आय के नए स्रोत विकसित करने पर समान रूप से ध्यान दिया जाए।

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