#विविध
January 30, 2026
हिमाचल की पंचायत में घोटाला : चुनाव से ठीक पहले प्रधान, उप-प्रधान सहित 5 सदस्य सस्पेंड
निलंबित पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की एक पंचायत में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। बालीचौकी उपमंडल की सुधराणी पंचायत में विकास कार्यों को लेकर सामने आई गंभीर गड़बड़ियों के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंचायत प्रधान, उपप्रधान सहित पांच सदस्यों को सस्पेंड कर दिया है।
यह कार्रवाई इसलिए भी असाधारण मानी जा रही है, क्योंकि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने में अब सिर्फ चार दिन बचे हैं। सस्पेंशन की गाज पंचायत प्रधान, उप्रधान और तीन वार्ड सदस्यों पर पड़ी है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पंचायत में कराए गए विकास कार्यों की जांच के लिए विकास खंड स्तर पर एक विशेष समिति गठित की गई थी। यह समिति उस शिकायत के आधार पर बनाई गई, जो स्थानीय निवासी चुनी लाल द्वारा दर्ज करवाई गई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पंचायत में मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत हुए कार्यों में नियमों की अनदेखी की गई है और सरकारी धन का सही इस्तेमाल नहीं हुआ। जांच समिति ने पंचायत के रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़े दस्तावेजों और जमीनी हकीकत की बारीकी से पड़ताल की।
जांच के दौरान यह सामने आया कि कुछ कार्यों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और ठेकेदारों को तय मानकों से अधिक राशि का भुगतान किया गया। समिति ने इन तथ्यों को अपनी रिपोर्ट में दर्ज करते हुए संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया।
रिपोर्ट के आधार पर पंचायत प्रधान, उपप्रधान और संबंधित वार्ड सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों की ओर से दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसी के चलते सक्षम प्राधिकारी ने सभी पर निलंबन की कार्रवाई करने का फैसला लिया।
वहीं, इस निर्णय के बाद निलंबित पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है और ठीक चुनावी माहौल के बीच इस तरह की कार्रवाई करना संदेह पैदा करता है।
उनका आरोप है कि यह कदम सोच-समझकर उठाया गया है ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। निलंबित प्रतिनिधियों ने संकेत दिए हैं कि वे इस फैसले के खिलाफ आगे कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सुधराणी पंचायत और आसपास के इलाकों में चर्चाओं का माहौल है। कुछ लोग इसे प्रशासन की सख्ती और जवाबदेही की दिशा में उठाया गया जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे समय को देखते हुए विवादास्पद फैसला बता रहे हैं।